लाइव
ब्रेकिंग न्यूज़
ब्रेकिंग न्यूज़ब्रेकिंग

पं. विजयशंकर मेहता का संदेश: भक्ति में निरंतरता जरूरी, धन से जुड़े साधुओं पर रखें सजगता

ICN24 Newsroom 10 जुल॰ 2026, 12:31 pm
पं. विजयशंकर मेहता का संदेश: भक्ति में निरंतरता जरूरी, धन से जुड़े साधुओं पर रखें सजगता

पंडित विजयशंकर मेहता ने भक्ति के चार स्तंभों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि आध्यात्मिक पथ पर धन के प्रभाव के प्रति सजग रहना क्यों आवश्यक है।

प्रख्यात आध्यात्मिक वक्ता पंडित विजयशंकर मेहता ने हाल ही में भक्ति और साधना के मर्म पर अपने विचार साझा किए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सच्ची भक्ति के लिए चार प्रमुख तत्वों की आवश्यकता होती है: नियमितता, निरंतरता, सजगता और एकाग्रता। इन गुणों के बिना आध्यात्मिक पथ पर आगे बढ़ना कठिन है। तुलसीदास जी द्वारा रचित हनुमान चालीसा की पंक्तियों—'नासै रोग हरै सब पीरा, जपत निरंतर हनुमत बीरा'—का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि 'निरंतरता' ही वह चाबी है जो कष्टों का निवारण करती है। विशेष रूप से भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के संदर्भ में, जहाँ लोग अपनी व्यस्त जीवनशैली के बीच अपनी जड़ों से जुड़े रहने का प्रयास कर रहे हैं, मेहता जी का यह संदेश अत्यंत प्रासंगिक है। सिडनी, मेलबर्न और ब्रिस्बेन जैसे शहरों में रहने वाले भारतीय प्रवासियों के लिए अक्सर काम और धर्म के बीच संतुलन बनाना एक चुनौती होती है। ऐसे में मेहता जी का सुझाव है कि भक्ति को केवल एक अनुष्ठान न मानकर उसे जीवन की एक सतत प्रक्रिया बनाना चाहिए। अपने स्तंभ में उन्होंने एक गंभीर विषय पर भी ध्यान आकर्षित किया है: धर्म और धन का संगम। मेहता जी के अनुसार, यदि कोई साधु या आध्यात्मिक गुरु धन से जुड़ा हो, तो अनुयायियों को बहुत सजगता बरतनी पड़ेगी। अध्यात्म का मूल त्याग और वैराग्य है, लेकिन जब बड़े संस्थानों और आश्रमों का संचालन होता है, तो धन का आगमन स्वाभाविक है। ऐसी स्थिति में साधु की शुचिता और भक्त की विवेकशीलता दोनों की परीक्षा होती है। उन्होंने सचेत किया कि धन का आकर्षण अक्सर आध्यात्मिक मार्ग से भटका सकता है। इसलिए, जो साधु सामाजिक या धार्मिक कार्यों के लिए धन का प्रबंधन कर रहे हैं, उन्हें सामान्य से अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है। भक्तों को भी अंधश्रद्धा के बजाय जागरूक रहकर यह देखना चाहिए कि उनके द्वारा दिया गया दान सही और पारदर्शी तरीके से उपयोग हो रहा है या नहीं। अंत में, पंडित विजयशंकर मेहता ने जोर देकर कहा कि एकाग्रता ही भक्ति की अंतिम सिद्धि है। जब मन पूरी तरह से सजग और एकाग्र होता है, तभी ईश्वर से जुड़ाव संभव है। ऑस्ट्रेलिया में बढ़ते भारतीय समुदाय के लिए, जो यहाँ के मंदिरों और सांस्कृतिक केंद्रों को उदारतापूर्वक दान देता है, यह लेख एक मार्गदर्शक की तरह है कि कैसे वे अपनी भक्ति की पवित्रता बनाए रखते हुए व्यावहारिक रूप से जागरूक रह सकते हैं।
शेयर:

संबंधित ख़बरें

आज का शुभ रंग: 11 जुलाई 2026 का लकी कलर, जानें अपनी राशि के लिए कौन सा रंग रहेगा भाग्यशाली
ब्रेकिंगब्रेकिंग

आज का शुभ रंग: 11 जुलाई 2026 का लकी कलर, जानें अपनी राशि के लिए कौन सा रंग रहेगा भाग्यशाली

11 जुलाई 2026 के लिए अपनी राशि के अनुसार सही रंग का चयन करें। जानें कैसे सही रंग आपके दिन को सकारात्मक और सफल बना सकता है।

11 जुल॰ 2026, 02:31 pm
ट्रम्प प्रशासन के न्याय विभाग ने मैरीलैंड पर किया मुकदमा; 'सैंक्चुअरी' नीतियों को दी चुनौती
ब्रेकिंगब्रेकिंग

ट्रम्प प्रशासन के न्याय विभाग ने मैरीलैंड पर किया मुकदमा; 'सैंक्चुअरी' नीतियों को दी चुनौती

अमेरिकी न्याय विभाग ने मैरीलैंड की 'सैंक्चुअरी' नीतियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की है, जो संघीय आव्रजन अधिकारियों के साथ सहयोग को सीमित करती हैं।

11 जुल॰ 2026, 01:31 pm
ग्लाइडर एडवांटेज: खेल कौशल से सीखें दबाव में बेहतर प्रदर्शन करने और तनाव जीतने के गुर
ब्रेकिंगब्रेकिंग

ग्लाइडर एडवांटेज: खेल कौशल से सीखें दबाव में बेहतर प्रदर्शन करने और तनाव जीतने के गुर

खेल जगत की मानसिक तकनीकों को अपनाकर अब आम लोग भी जीवन की चुनौतियों और पेशेवर दबाव का सामना आत्मविश्वास के साथ कर सकते हैं।

11 जुल॰ 2026, 12:31 pm