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ताजमहल या 'तेजो महालय'? सर्वे की मांग पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने केंद्र और ASI से मांगा जवाब

ICN24 Newsroom 7 जुल॰ 2026, 01:31 pm
ताजमहल या 'तेजो महालय'? सर्वे की मांग पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने केंद्र और ASI से मांगा जवाब

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ताजमहल परिसर के वैज्ञानिक सर्वेक्षण की मांग वाली याचिका पर केंद्र सरकार और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज स्थित इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में ताजमहल को लेकर दायर एक नई याचिका पर केंद्र सरकार और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को नोटिस जारी किया है। न्यायमूर्ति सुमित गोपाल की पीठ ने यह आदेश आगरा की निचली अदालत के उस फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर दिया है, जिसमें ताजमहल के सर्वे की मांग को खारिज कर दिया गया था। इस कानूनी कदम ने एक बार फिर भारत के सबसे प्रतिष्ठित स्मारक के ऐतिहासिक स्वरूप को लेकर नई बहस छेड़ दी है। याचिकाकर्ता योगेश्वर सिंह द्वारा दायर इस पुनरीक्षण याचिका (Revision Petition) में दावा किया गया है कि ताजमहल वास्तव में एक प्राचीन शिव मंदिर है, जिसे 'तेजो महालय' के नाम से जाना जाता था। याचिका में मांग की गई है कि स्मारक के बंद कमरों का वैज्ञानिक सर्वेक्षण कराया जाए और हिंदू समुदाय को वहां पूजा-अर्चना करने की अनुमति दी जाए। याचिकाकर्ता का तर्क है कि आगरा की स्थानीय अदालत ने तथ्यों की सही जांच किए बिना उनकी मांग को खारिज कर दिया था, इसलिए अब उच्च न्यायालय को इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए। अदालत में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकीलों ने दलील दी कि ताजमहल के भीतर कई ऐसे साक्ष्य छिपे हो सकते हैं जो इसके मंदिर होने की पुष्टि करते हैं। उन्होंने ज्ञानवापी मामले का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह वहां वैज्ञानिक सर्वेक्षण के माध्यम से ऐतिहासिक तथ्यों को सामने लाया गया, उसी तर्ज पर ताजमहल परिसर की भी जांच होनी चाहिए। हालांकि, अब तक केंद्र सरकार और ASI ने आधिकारिक तौर पर इस दावे को खारिज किया है कि ताजमहल मंदिर है। पुरातत्व विभाग के अनुसार, यह स्मारक एक मकबरा है और इसे ऐतिहासिक दस्तावेजों के आधार पर संरक्षित किया गया है। इस मामले का प्रभाव केवल भारत की सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय (Diaspora) के बीच भी इसकी गहरी चर्चा है। सिडनी, मेलबर्न और ब्रिस्बेन जैसे शहरों में रहने वाले प्रवासी भारतीय, जो भारत की सांस्कृतिक विरासत और कानूनी घटनाक्रमों पर पैनी नजर रखते हैं, इस खबर को अपनी पहचान और इतिहास के प्रति बढ़ती जागरूकता के रूप में देख रहे हैं। ऑस्ट्रेलियाई-भारतीय समुदाय के लिए भारत के ऐतिहासिक स्थलों की सुरक्षा और उनके वास्तविक इतिहास का निर्धारण एक भावनात्मक विषय है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अब केंद्र और ASI को अपना पक्ष रखने के लिए समय दिया है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि 'पूजा स्थल अधिनियम 1991' (Places of Worship Act) इस मामले में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, क्योंकि यह कानून 15 अगस्त 1947 के समय के किसी भी धार्मिक स्थल के स्वरूप को बदलने पर रोक लगाता है। हालांकि, ताजमहल को एक प्राचीन स्मारक के रूप में वर्गीकृत किया गया है, जिससे इस पर लागू होने वाले नियम थोड़े अलग हो सकते हैं। मामले की अगली सुनवाई जल्द ही होने की उम्मीद है, जिस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी होंगी।
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