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वाशिंगटन में नेतन्याहू का भारी विरोध: सायरन की गूंज और प्रदर्शनों के बीच शुरू हुई इजराइली पीएम की अमेरिका यात्रा

ICN24 Newsroom 29 जुल॰ 2026, 01:36 am
वाशिंगटन में नेतन्याहू का भारी विरोध: सायरन की गूंज और प्रदर्शनों के बीच शुरू हुई इजराइली पीएम की अमेरिका यात्रा

इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की वाशिंगटन यात्रा के दौरान हजारों प्रदर्शनकारियों ने सायरन और नारों के साथ गाजा में युद्धविराम की मांग की।

इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की वाशिंगटन डी.सी. की यात्रा की शुरुआत भारी हंगामे और विरोध प्रदर्शनों के साथ हुई। जैसे ही नेतन्याहू का काफिला अमेरिकी राजधानी पहुंचा, प्रदर्शनकारियों ने 'सायरन ब्लिट्ज' और गूंजते नारों के साथ उनका स्वागत किया। प्रदर्शनकारियों का मुख्य उद्देश्य गाजा में चल रहे युद्ध को तत्काल समाप्त करने और फिलिस्तीनी नागरिकों के प्रति एकजुटता प्रदर्शित करना था। वाशिंगटन की सड़कों पर सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बावजूद, प्रदर्शनकारियों की आवाजें नेतन्याहू के प्रवास स्थल के आसपास साफ सुनी जा सकती थीं। यह विरोध प्रदर्शन उस समय हो रहा है जब नेतन्याहू अमेरिकी कांग्रेस के संयुक्त सत्र को संबोधित करने की तैयारी कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने वाटरगेट होटल, जहां प्रधानमंत्री ठहरे हुए हैं, के बाहर और कैपिटल हिल के आसपास के क्षेत्रों में भारी जमावड़ा किया। प्रदर्शनकारियों ने न केवल सायरन बजाए, बल्कि 'फ्री फिलिस्तीन' और 'युद्धविराम अब' जैसे नारे भी लगाए। कई प्रदर्शनकारियों का मानना है कि अमेरिका को इजराइल को दी जाने वाली सैन्य सहायता पर रोक लगानी चाहिए ताकि युद्ध को और बढ़ने से रोका जा सके। भारत और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के लिए यह कूटनीतिक घटनाक्रम काफी महत्वपूर्ण है। ऑस्ट्रेलिया में भी पिछले कुछ महीनों में मेलबर्न और सिडनी जैसे प्रमुख शहरों में इसी तरह के बड़े विरोध प्रदर्शन देखे गए हैं, जहां भारतीय और अन्य प्रवासी समुदायों ने मानवीय आधार पर गाजा में शांति की अपील की है। भारतीय मूल के ऑस्ट्रेलियाई नागरिक, जो वैश्विक शांति और मानवाधिकारों के प्रति संवेदनशील हैं, इस यात्रा और इसके परिणामों पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। भारत के लिए भी यह एक जटिल स्थिति है, क्योंकि वह इजराइल के साथ मजबूत रक्षा संबंधों और फिलिस्तीनी मुद्दे पर अपने ऐतिहासिक रुख के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। सुरक्षा बलों ने कैपिटल कॉम्प्लेक्स के चारों ओर अतिरिक्त बाड़ लगा दी है और पुलिस की भारी तैनाती की गई है। इसके बावजूद, प्रदर्शनकारियों का उत्साह कम नहीं हुआ। कई समूहों ने चेतावनी दी है कि वे नेतन्याहू के पूरे प्रवास के दौरान अपना विरोध जारी रखेंगे। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नेतन्याहू की इस यात्रा को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। जहां अमेरिकी प्रशासन के कुछ सदस्य इसे द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के अवसर के रूप में देख रहे हैं, वहीं प्रगतिशील डेमोक्रेट्स और मानवाधिकार संगठनों ने इस यात्रा का कड़ा विरोध किया है। नेतन्याहू के लिए यह दौरा राजनीतिक रूप से भी चुनौतीपूर्ण है। उनके अपने देश में भी बंधकों की रिहाई और युद्ध के प्रबंधन को लेकर व्यापक विरोध हो रहा है। वाशिंगटन में हो रहे ये प्रदर्शन वैश्विक स्तर पर बढ़ते उस दबाव का प्रतीक हैं, जो गाजा में मानवीय संकट को लेकर इजराइल और उसके सहयोगियों पर बनाया जा रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या यह यात्रा युद्धविराम की दिशा में कोई ठोस कदम बढ़ा पाती है या यह केवल कूटनीतिक औपचारिकताओं तक ही सीमित रहती है।
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