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नीट विरोध प्रदर्शन: सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस कार्रवाई की SIT जांच के संकेत दिए, हिरासत में लिए गए नाबालिगों की रिहाई के आदेश

ICN24 Newsroom 28 जुल॰ 2026, 11:36 pm
नीट विरोध प्रदर्शन: सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस कार्रवाई की SIT जांच के संकेत दिए, हिरासत में लिए गए नाबालिगों की रिहाई के आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने नीट प्रदर्शनों के दौरान पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच की आवश्यकता जताई है और बिना आपराधिक रिकॉर्ड वाले नाबालिग छात्रों को रिहा करने का निर्देश दिया है।

भारत के उच्चतम न्यायालय ने नीट-यूजी (NEET-UG) परीक्षा में कथित अनियमितताओं के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस और छात्रों के बीच हुई हिंसक झड़पों पर कड़ा रुख अपनाया है। न्यायालय ने संकेत दिया है कि छात्रों के खिलाफ पुलिस की कथित ज्यादतियों और लगभग 250 पुलिसकर्मियों पर हुए हमलों की घटनाओं की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया जा सकता है। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की पीठ ने स्पष्ट किया कि इस पूरे मामले में एक निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की आवश्यकता है ताकि सच्चाई सामने आ सके। अदालत ने मानवीय आधार पर एक महत्वपूर्ण अंतरिम राहत देते हुए अधिकारियों को निर्देश दिया है कि हिरासत में लिए गए उन सभी छात्रों को तुरंत रिहा किया जाए जिनकी आयु 18 वर्ष से कम है और जिनका कोई पिछला आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। यह आदेश उन परिवारों के लिए एक बड़ी राहत के रूप में आया है जिनके बच्चे परीक्षा परिणामों के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन का हिस्सा थे, लेकिन बाद में पुलिसिया कार्रवाई की चपेट में आ गए। पीठ ने कहा कि प्रदर्शन करने का अधिकार मौलिक है, लेकिन इसे कानून और व्यवस्था की सीमा के भीतर रहना चाहिए। सुनवाई के दौरान, याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने पुलिस द्वारा बल प्रयोग और छात्रों को निशाना बनाने के गंभीर आरोप लगाए। दूसरी ओर, राज्य प्रशासन ने दलील दी कि भीड़ के हिंसक होने के कारण 250 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा कि वह किसी एक पक्ष की बात पर आँख मूंदकर विश्वास नहीं करेगा, बल्कि एक स्वतंत्र जांच के माध्यम से तथ्यों की पुष्टि करना चाहेगा। न्यायालय ने यह भी टिप्पणी की कि शिक्षा प्रणाली में छात्रों का विश्वास बहाल करना प्राथमिकता होनी चाहिए। यह घटनाक्रम ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के लिए भी अत्यंत प्रासंगिक है। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले हजारों प्रवासी भारतीयों के बच्चे हर साल 'एनआरआई कोटे' (NRI Quota) के तहत नीट परीक्षा में शामिल होने के लिए भारत जाते हैं या वहां की मेडिकल शिक्षा प्रणाली पर गहरी नजर रखते हैं। भारत की प्रतिष्ठित परीक्षाओं की विश्वसनीयता में किसी भी प्रकार की कमी या छात्रों के साथ होने वाला अन्याय वैश्विक स्तर पर भारतीय शिक्षा की साख को प्रभावित करता है। मेलबर्न और सिडनी जैसे शहरों में रहने वाले भारतीय अभिभावक इस मामले को लेकर चिंतित हैं, क्योंकि यह सीधे तौर पर उनके बच्चों के भविष्य और भारत के साथ उनके शैक्षिक जुड़ाव से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट ने अब इस मामले की अगली सुनवाई के लिए विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। SIT की संभावना पर विचार करते हुए कोर्ट ने यह सुनिश्चित करने को कहा है कि किसी भी निर्दोष छात्र को अनावश्यक रूप से परेशान न किया जाए। यह मामला न केवल नीट परीक्षा की शुचिता को लेकर है, बल्कि लोकतांत्रिक विरोध और पुलिस के आचरण के बीच के संतुलन को भी परिभाषित करेगा। आगामी हफ्तों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या सरकार और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) छात्रों के विश्वास को फिर से जीतने के लिए पर्याप्त कदम उठा पाती हैं या नहीं।
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