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भोपाल में किसानों का बड़ा आंदोलन: मूंग की शत-प्रतिशत खरीद की मांग को लेकर भारी पुलिस बल और किसान आमने-सामने

ICN24 Newsroom 29 जुल॰ 2026, 02:35 am
भोपाल में किसानों का बड़ा आंदोलन: मूंग की शत-प्रतिशत खरीद की मांग को लेकर भारी पुलिस बल और किसान आमने-सामने

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में मूंग की 100% खरीद की मांग को लेकर हजारों किसान सड़कों पर उतर आए हैं। पुलिस ने सीएम हाउस जाने से रोकने के लिए भारी घेराबंदी की है।

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक बार फिर किसान आंदोलन की गूंज सुनाई दे रही है। प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से आए हजारों किसान अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतर आए हैं, जिससे प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए हैं। मूंग (Green Gram) की फसल की शत-प्रतिशत सरकारी खरीद की मांग को लेकर लगभग 2000 से अधिक किसानों ने भोपाल के होशंगाबाद रोड पर डेरा डाल दिया है। इन किसानों का इरादा मुख्यमंत्री निवास का घेराव करने का था, लेकिन पुलिस ने उन्हें बीच रास्ते में ही रोक लिया है। प्रदर्शनकारी किसान पूरी तैयारी के साथ आए हैं। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि वे केवल अपनी मांगों को मनवाने आए हैं और इसके लिए उन्होंने राशन, पानी और टेंट का इंतजाम भी साथ रखा है। किसानों का कहना है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर ठोस आश्वासन नहीं देती, वे भोपाल से वापस नहीं जाएंगे। मौके पर स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है क्योंकि किसान बैरिकेड्स तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि पुलिस उन्हें आगे बढ़ने से रोक रही है। सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए मध्य प्रदेश पुलिस ने व्यापक इंतजाम किए हैं। किसानों को रोकने के लिए स्टेट आर्म्ड फोर्स (SAF), रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और 20 से अधिक थानों की पुलिस को तैनात किया गया है। राजधानी के प्रमुख चौराहों और मुख्यमंत्री निवास की ओर जाने वाली सड़कों को छावनी में तब्दील कर दिया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है और किसानों से शांति बनाए रखने की अपील की जा रही है। किसानों की मुख्य मांग मूंग की फसल की सरकारी खरीद की सीमा को लेकर है। वर्तमान नियमों के तहत खरीद की एक निश्चित सीमा तय है, लेकिन किसानों का तर्क है कि इस साल पैदावार अच्छी हुई है और अगर सरकार पूरी फसल नहीं खरीदती है, तो उन्हें खुले बाजार में औने-पौने दामों पर फसल बेचनी पड़ेगी। इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय, विशेषकर वे जो मध्य प्रदेश और मालवा क्षेत्र से ताल्लुक रखते हैं, इस घटनाक्रम पर करीब से नजर रख रहे हैं, क्योंकि कई एनआरआई परिवारों की जड़ें आज भी खेती-किसानी से जुड़ी हुई हैं। यह आंदोलन ऐसे समय में हो रहा है जब प्रदेश में कृषि नीतियों को लेकर पहले से ही बहस छिड़ी हुई है। विपक्षी दलों ने भी किसानों के समर्थन में स्वर मुखर करना शुरू कर दिया है। सरकार के लिए यह स्थिति एक बड़ी चुनौती पेश कर रही है, क्योंकि किसानों का यह जत्था पीछे हटने को तैयार नहीं है। प्रशासन और किसान प्रतिनिधियों के बीच बातचीत के प्रयास जारी हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस समाधान निकलता नहीं दिख रहा है।
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