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केंद्रीय सतर्कता आयोग ने एसईसीएल के तकनीकी सुधारों को सराहा; 'विजआई वाणी' में मिली विशेष जगह

ICN24 Newsroom 3 जुल॰ 2026, 08:31 pm
केंद्रीय सतर्कता आयोग ने एसईसीएल के तकनीकी सुधारों को सराहा; 'विजआई वाणी' में मिली विशेष जगह

साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) द्वारा सतर्कता और पारदर्शिता के क्षेत्र में किए गए तकनीकी नवाचारों को केंद्रीय सतर्कता आयोग ने अपनी विशेष पत्रिका में स्थान दिया है।

साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल), जो कोल इंडिया की एक प्रमुख सहायक कंपनी है, ने अपने प्रशासनिक और परिचालन ढांचे में पारदर्शिता लाने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) ने अपनी प्रतिष्ठित विशेष पत्रिका 'विजआई वाणी' (VigEye Vani) के नवीनतम अंक में एसईसीएल के तकनीकी आधारित सतर्कता सुधारों को प्रमुखता से प्रदर्शित किया है। यह मान्यता न केवल कंपनी की आंतरिक कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने के प्रयासों को दर्शाती है, बल्कि सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के लिए एक नया मानक भी स्थापित करती है। सीवीसी की इस विशेष रिपोर्ट में एसईसीएल द्वारा अपनाए गए आधुनिक उपकरणों जैसे कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित निगरानी, 'डिजीकोल' (DigiCOAL) पोर्टल और जीपीएस-आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम की सराहना की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, इन नवाचारों ने कोयला खनन और वितरण की प्रक्रिया में मानवीय हस्तक्षेप को कम कर भ्रष्टाचार की संभावनाओं को न्यूनतम किया है। विशेष रूप से, खदानों के भीतर और बाहर कोयले की आवाजाही पर कड़ी नजर रखने के लिए उपयोग किए जा रहे 'कमांड एंड कंट्रोल सेंटर' को एक सफल केस स्टडी के रूप में पेश किया गया है। 'डिजीकोल' प्रणाली के माध्यम से, एसईसीएल ने चालान जनरेशन, लोडिंग शेड्यूलिंग और गुणवत्ता जांच की प्रक्रिया को पूरी तरह से डिजिटल कर दिया है। इससे न केवल परिचालन दक्षता में वृद्धि हुई है, बल्कि ग्राहकों और हितधारकों के बीच विश्वास की भावना भी मजबूत हुई है। ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय, विशेष रूप से वे जो खनन और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े हैं, के लिए यह विकास महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भारत के ऊर्जा क्षेत्र में वैश्विक मानकों के अनुरूप पारदर्शिता और जवाबदेही के बढ़ते स्तर को रेखांकित करता है। सतर्कता विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इन सुधारों का मुख्य उद्देश्य केवल शिकायतों का निपटारा करना नहीं, बल्कि ऐसी प्रणालियां विकसित करना है जो विसंगतियों को शुरू होने से पहले ही रोक सकें। जीपीएस-आधारित निगरानी ने कोयला चोरी की घटनाओं को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जबकि एआई कैमरों की मदद से सुरक्षा और नियमों के पालन को सुनिश्चित किया जा रहा है। केंद्रीय सतर्कता आयोग द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर दी गई यह पहचान एसईसीएल के लिए भविष्य के तकनीकी निवेशों को और प्रोत्साहित करेगी। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच ऊर्जा और खनिजों को लेकर बढ़ते रणनीतिक सहयोग के दौर में, भारतीय सार्वजनिक उपक्रमों द्वारा अपनाए जा रहे ये आधुनिक सुरक्षा और पारदर्शिता उपाय अंतरराष्ट्रीय निवेशकों और भागीदारों के लिए एक सकारात्मक संकेत हैं। यह दर्शाता है कि भारत का कोयला उद्योग न केवल उत्पादन बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, बल्कि शासन (गवर्नेंस) के उच्चतम मानकों को भी अपना रहा है।
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