राजनीति
रूस और चीन ने 2026 में भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के प्रति जताया अपना अटूट समर्थन
ICN24 Newsroom 13 अग॰ 2026, 07:37 pm

नई दिल्ली में आयोजित एक विशेष चर्चा के दौरान रूसी और चीनी राजनयिकों ने 2026 में भारत की आगामी ब्रिक्स अध्यक्षता का पुरजोर समर्थन किया है।
नई दिल्ली में आयोजित एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक घटनाक्रम में, रूस और चीन के शीर्ष राजनयिकों ने साल 2026 में भारत की ब्रिक्स (BRICS) अध्यक्षता के प्रति अपना पूर्ण समर्थन दोहराया है। विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन (VIF) द्वारा आयोजित 'लचीले और टिकाऊ वैश्विक व्यवस्था के निर्माण में ब्रिक्स की भूमिका और प्राथमिकताएं' विषय पर राउंडटेबल चर्चा के दौरान यह प्रतिबद्धता जताई गई। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब भारत वैश्विक मंच पर अपनी भूमिका को और मजबूत करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है।
भारत में चीन के राजदूत जू फीहोंग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर अपने विचार साझा करते हुए ब्रिक्स सहयोग की दिशा को 'MAGIC' के सूत्र से समझाया। इसमें एम (Multilateralism) का अर्थ बहुपक्षीयता, ए (Action) का अर्थ कार्रवाई, जी (Global Governance) का अर्थ वैश्विक शासन, आई (Inclusiveness) का अर्थ समावेशिता और सी (Cooperation) का अर्थ सहयोग है। राजदूत फीहोंग ने स्पष्ट किया कि चीन, भारत की अध्यक्षता का पूर्ण समर्थन करता है और सदस्य देशों के बीच रचनात्मक सहयोग को मजबूत करने के लिए कंधे से कंधा मिलाकर काम करने के लिए तैयार है।
इसी तरह, रूसी दूतावास के प्रभारी रोमन बाबुश्किन ने भी भारत की प्राथमिकताओं पर भरोसा जताया। रूसी दूतावास ने टेलीग्राम पर साझा किया कि पिछले दो दशकों में ब्रिक्स एक प्रभावी तंत्र के रूप में विकसित हुआ है। बाबुश्किन ने कहा कि यह समूह बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था में 'वैश्विक बहुमत' (Global Majority) के हितों को आगे बढ़ाने का एक प्रभावशाली मंच बन गया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि 2026 में भारत का नेतृत्व इस ब्लॉक को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।
2026 में भारत चौथी बार ब्रिक्स की कमान संभालेगा। इससे पहले भारत 2012, 2016 और 2021 में भी यह जिम्मेदारी निभा चुका है। इस बार की अध्यक्षता का विषय 'लचीलेपन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण' (Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability) रखा गया है। यह विजन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2025 के रियो शिखर सम्मेलन में व्यक्त किए गए 'मानवता प्रथम' के दृष्टिकोण को दर्शाता है।
ब्रिक्स समूह अब 11 प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं का एक शक्तिशाली मंच बन चुका है, जिसमें ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका के साथ अब मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात भी शामिल हैं। चर्चा के दौरान जलवायु परिवर्तन, व्यापार, डिजिटल शासन, खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर जोर दिया गया।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए यह घटनाक्रम काफी महत्वपूर्ण है। ऑस्ट्रेलिया के लिए भारत एक प्रमुख रणनीतिक साझेदार है, और भारत का ब्रिक्स जैसी संस्थाओं में नेतृत्व करना वैश्विक अर्थव्यवस्था में उसकी बढ़ती ताकत का प्रतीक है। जब भारत वैश्विक दक्षिण (Global South) की आवाज बनता है, तो इसका सीधा प्रभाव उन अंतरराष्ट्रीय नीतियों पर पड़ता है जो प्रवासियों और वैश्विक व्यापार को प्रभावित करती हैं। भारत की यह बहुआयामी कूटनीति उसे एक 'सेतु' के रूप में स्थापित करती है, जो पश्चिमी देशों और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच संतुलन बनाने का काम कर रहा है।
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