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'विदेशी घुसपैठ और हथियारों की तस्करी...': 1996 के स्वतंत्रता दिवस पर पूर्व पीएम एचडी देवेगौड़ा की पूर्वोत्तर को लेकर चेतावनी

ICN24 Newsroom 13 अग॰ 2026, 05:37 pm
'विदेशी घुसपैठ और हथियारों की तस्करी...': 1996 के स्वतंत्रता दिवस पर पूर्व पीएम एचडी देवेगौड़ा की पूर्वोत्तर को लेकर चेतावनी

1996 में लाल किले से दिए अपने भाषण में तत्कालीन प्रधानमंत्री एच. डी. देवेगौड़ा ने पूर्वोत्तर भारत में सुरक्षा चुनौतियों और विदेशी हस्तक्षेप पर कड़ा रुख अपनाया था।

भारत जब अपने स्वतंत्रता दिवस के आगामी उत्सव की तैयारी कर रहा है, तब देश के राजनीतिक इतिहास के पन्नों को पलटना और पूर्व प्रधानमंत्रियों द्वारा लाल किले की प्राचीर से दिए गए संदेशों का विश्लेषण करना सामयिक हो जाता है। 1996 का वह वर्ष विशेष रूप से महत्वपूर्ण था, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री एच. डी. देवेगौड़ा ने पूर्वोत्तर भारत की नाजुक सुरक्षा स्थिति पर देश का ध्यान आकर्षित किया था। उनके भाषण ने न केवल क्षेत्रीय चुनौतियों को रेखांकित किया, बल्कि विदेशी हस्तक्षेप और हथियारों की तस्करी जैसे गंभीर मुद्दों पर कड़ा रुख भी अपनाया। 15 अगस्त 1996 को दिए अपने संबोधन में, प्रधानमंत्री देवेगौड़ा ने स्पष्ट किया था कि पूर्वोत्तर राज्यों में शांति और स्थिरता के लिए बाहरी तत्वों द्वारा पैदा की जा रही बाधाएं एक बड़ी चिंता का विषय हैं। उन्होंने विशेष रूप से 'विदेशी घुसपैठियों' और सीमा पार से होने वाली 'हथियारों की तस्करी' का उल्लेख किया था, जो उस समय क्षेत्र में उग्रवाद को बढ़ावा दे रहे थे। देवेगौड़ा का यह रुख उस समय आया था जब भारत में संयुक्त मोर्चा (United Front) की गठबंधन सरकार सत्ता में थी और देश आर्थिक सुधारों के साथ-साथ आंतरिक सुरक्षा की चुनौतियों से जूझ रहा था। देवेगौड़ा ने अपने भाषण में जोर देकर कहा था कि पूर्वोत्तर के विकास के बिना भारत की प्रगति अधूरी है। उन्होंने स्वीकार किया कि दशकों की उपेक्षा ने क्षेत्र में असंतोष पैदा किया है, जिसका फायदा राष्ट्र-विरोधी तत्व उठा रहे हैं। उनके नेतृत्व में सरकार ने पूर्वोत्तर के लिए विशेष आर्थिक पैकेज की घोषणा की थी, लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी चेतावनी दी थी कि जो लोग हिंसा का रास्ता अपनाते हैं और विदेशी ताकतों के साथ मिलकर देश की अखंडता को चुनौती देते हैं, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए, यह ऐतिहासिक संदर्भ भारत की वर्तमान 'एक्ट ईस्ट' नीति को समझने में मदद करता है। आज जब हम भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों में सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग को बढ़ते हुए देखते हैं, तो यह याद रखना जरूरी है कि भारत ने अपनी सीमाओं को सुरक्षित करने और पूर्वोत्तर को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए एक लंबा सफर तय किया है। 1996 में देवेगौड़ा द्वारा दी गई वह चेतावनी आज भी प्रासंगिक है, क्योंकि भारत अब भी सीमा सुरक्षा और साइबर सुरक्षा जैसी नई चुनौतियों का सामना कर रहा है। कुल मिलाकर, देवेगौड़ा का वह भाषण केवल एक औपचारिक संबोधन नहीं था, बल्कि वह भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा नीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ था। उन्होंने विकास और सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की थी, जो आज भी भारत सरकार की पूर्वोत्तर नीति का आधार बनी हुई है। स्वतंत्रता दिवस के इस अवसर पर, यह इतिहास हमें याद दिलाता है कि भारत की संप्रभुता को बनाए रखने के लिए हर दौर में नेतृत्व को कड़े और निर्णायक कदम उठाने पड़े हैं।
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