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280,000 पेड़ों ने बदला न्यूजीलैंड के तिरिति‍रि मतांगी द्वीप का चेहरा: सामुदायिक प्रयास की एक मिसाल

ICN24 Newsroom 13 अग॰ 2026, 05:38 pm
280,000 पेड़ों ने बदला न्यूजीलैंड के तिरिति‍रि मतांगी द्वीप का चेहरा: सामुदायिक प्रयास की एक मिसाल

न्यूजीलैंड के ऑकलैंड तट के पास स्थित तिरिति‍रि मतांगी द्वीप कभी बंजर खेत था, लेकिन आज 2.8 लाख पेड़ों के साथ यह एक घना जंगल और दुर्लभ पक्षियों का स्वर्ग बन चुका है।

न्यूजीलैंड के ऑकलैंड तट से दूर, होराकी खाड़ी (Hauraki Gulf) के शांत पानी के बीच स्थित तिरिति‍रि मतांगी (Tiritiri Matangi) द्वीप आज प्राकृतिक सुंदरता की एक बेमिसाल तस्वीर पेश करता है। लेकिन हमेशा से ऐसा नहीं था। एक समय यह द्वीप पूरी तरह से बंजर था और यहाँ केवल खेती की जाती थी। इस द्वीप का कायाकल्प करीब 2,80,000 देशी पेड़ों के रोपण के माध्यम से हुआ है, जिसने इसे न्यूजीलैंड के सबसे महत्वपूर्ण संरक्षण परियोजनाओं में से एक बना दिया है। लगभग 120 वर्षों तक इस द्वीप का उपयोग चरागाह के रूप में किया गया, जिससे इसकी मूल वनस्पति लगभग समाप्त हो गई थी। 1980 के दशक की शुरुआत तक, यहाँ केवल घास के मैदान बचे थे और वन्यजीवों का नामोन्शान नहीं था। इस बदलाव की शुरुआत 1984 में हुई, जब स्वयंसेवकों और संरक्षणवादियों ने द्वीप को उसके पुराने गौरव में वापस लाने का बीड़ा उठाया। अगले दस वर्षों में, हजारों लोगों ने मिलकर यहाँ न्यूजीलैंड के मूल पौधों, जैसे कि पोहुतुकावा और कोवाइ, की पौधारोपण की। आज, यह द्वीप एक 'खुला अभयारण्य' (Open Sanctuary) है। यहाँ का जंगल इतना घना है कि यह लुप्तप्राय पक्षियों जैसे कि ताकाहे (Takahe) और कोकाको (Kokako) के लिए एक सुरक्षित आश्रय बन गया है। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए, जो अक्सर न्यूजीलैंड की यात्रा करते हैं, यह स्थान न केवल पर्यटन बल्कि पर्यावरण संरक्षण की एक बड़ी सीख भी है। ऑस्ट्रेलिया के बुशफायर (जंगलों की आग) और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच, तिरिति‍रि मतांगी की सफलता यह दिखाती है कि अगर समुदाय ठान ले, तो प्रकृति को पुनर्जीवित किया जा सकता है। सिर्फ पेड़ ही नहीं, बल्कि इस द्वीप ने एक पूरा पारिस्थितिक तंत्र (ecosystem) वापस पाया है। यहाँ अब सरीसृप, कीट और पक्षियों की ऐसी प्रजातियां फल-फूल रही हैं जो मुख्य भूमि पर लगभग विलुप्त हो चुकी थीं। यहाँ जाने वाले पर्यटकों को सख़्त नियमों का पालन करना पड़ता है ताकि कोई बाहरी जीव या बीज द्वीप की स्वच्छता को खराब न कर सके। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय, जो पर्यावरण के प्रति तेजी से जागरूक हो रहा है और स्थानीय 'लैंडकेयर' समूहों से जुड़ रहा है, के लिए यह कहानी एक प्रेरणा है। यह साबित करता है कि इंसानी दखल अगर सकारात्मक हो, तो दशकों के नुकसान को भी भरा जा सकता है। तिरिति‍रि मतांगी आज केवल एक द्वीप नहीं, बल्कि पारिस्थितिक बहाली (ecological restoration) का एक वैश्विक प्रतीक बन चुका है।
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