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रीवा: 'कालोनाइजरों की जमीनें करो कुर्क, दर्ज करो FIR!' सुदर्शन नगर के निवासियों ने कलेक्ट्रेट में किया जोरदार प्रदर्शन
ICN24 Newsroom 13 अग॰ 2026, 06:37 pm

रीवा के अनंतपुर सुदर्शन नगर के निवासियों ने बुनियादी सुविधाओं के अभाव और कालोनाइजरों की धोखाधड़ी के खिलाफ कलेक्ट्रेट में विरोध प्रदर्शन किया।
मध्य प्रदेश के रीवा जिले में भू-माफियाओं और लापरवाह कालोनाइजरों के खिलाफ जनता का आक्रोश फूट पड़ा है। शहर के अनंतपुर स्थित सुदर्शन नगर के सैकड़ों निवासियों ने अपनी मांगों को लेकर रीवा कलेक्ट्रेट कार्यालय का घेराव किया। प्रदर्शनकारियों ने जमकर नारेबाजी की और प्रशासन से मांग की कि दोषी कालोनाइजरों के खिलाफ तत्काल एफआईआर (FIR) दर्ज की जाए और उनकी संपत्तियों को कुर्क किया जाए।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि कालोनाइजरों ने प्लॉट बेचते समय बड़े-बड़े वादे किए थे, लेकिन आज सालों बीत जाने के बाद भी सुदर्शन नगर बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहा है। कॉलोनी में न तो पक्की सड़कें हैं, न ही जल निकासी के लिए नालियों की व्यवस्था। बिजली के खंभे तो खड़े कर दिए गए हैं, लेकिन पर्याप्त वोल्टेज और कनेक्शन की समस्या बनी हुई है। बारिश के मौसम में पूरी कॉलोनी टापू में तब्दील हो जाती है, जिससे बुजुर्गों और बच्चों का घर से निकलना दूभर हो जाता है।
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे स्थानीय निवासियों ने बताया कि उन्होंने अपनी जीवन भर की गाढ़ी कमाई इन भूखंडों को खरीदने में लगा दी थी। उन्हें उम्मीद थी कि शहर के पास एक व्यवस्थित कॉलोनी में उनका अपना घर होगा, लेकिन कालोनाइजरों ने पैसा वसूलने के बाद कॉलोनी को लावारिस छोड़ दिया है। निवासियों का कहना है कि उन्होंने कई बार संबंधित डेवलपर्स से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उन्हें केवल झूठे आश्वासन मिले या फिर उन्हें डराया-धमकाया गया।
कलेक्ट्रेट पहुंचे प्रदर्शनकारियों ने जिला कलेक्टर के नाम एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि यदि प्रशासन ने जल्द ही कालोनाइजरों पर नकेल नहीं कसी, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। निवासियों ने मांग की है कि नगर निगम और प्रशासन को हस्तक्षेप कर कॉलोनी का विकास अपने हाथ में लेना चाहिए और इसका खर्च दोषी कालोनाइजरों की संपत्ति बेचकर वसूलना चाहिए।
रीवा की यह घटना भारत के टायर-2 शहरों में बढ़ते रियल एस्टेट विवादों का एक छोटा सा हिस्सा है। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले प्रवासी भारतीय (NRIs), जो अक्सर अपने गृहनगर में निवेश के उद्देश्य से प्लॉट खरीदते हैं, उनके लिए भी यह एक चेतावनी है। कानूनी पेचीदगियों और स्थानीय प्रशासन की सुस्ती के कारण अक्सर ऐसे मामले सालों तक लटके रहते हैं, जिससे निवेशकों का पैसा और मानसिक शांति दोनों दांव पर लग जाते हैं।
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