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महंगाई के जोखिमों पर आरबीआई की पैनी नजर, संजय मल्होत्रा ने अर्थव्यवस्था को बताया स्थिर
ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 07:53 am
भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने रेपो रेट को 5.25% पर बरकरार रखा है। पश्चिम एशिया संघर्ष और अल नीनो के प्रभाव को देखते हुए यह फैसला लिया गया है।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की हालिया बैठक के मिनटों से यह स्पष्ट हो गया है कि केंद्रीय बैंक फिलहाल 'इंतजार करो और देखो' की नीति पर चल रहा है। समिति ने सर्वसम्मति से रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखने का निर्णय लिया है। संजय मल्होत्रा और पैनल के अन्य सदस्यों ने देश की आर्थिक स्थिति को स्थिर बताते हुए आगाह किया है कि वैश्विक अनिश्चितताओं और घरेलू कारकों के कारण महंगाई का दबाव अभी भी बना हुआ है।
इस निर्णय के पीछे प्रमुख कारणों में पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और उसके परिणामस्वरूप कच्चे तेल की कीमतों में संभावित उछाल को माना जा रहा है। इसके साथ ही, भारत में अल नीनो (El Niño) के प्रभाव के कारण कृषि उत्पादन और खाद्य कीमतों पर पड़ने वाले असर को लेकर भी चिंता व्यक्त की गई है। मल्होत्रा ने रेखांकित किया कि हालांकि भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है, लेकिन मुद्रास्फीति (महंगाई) को 4 प्रतिशत के लक्ष्य के करीब लाने के लिए सतर्कता बरतना आवश्यक है।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए भारत की मौद्रिक नीति का सीधा महत्व है। भारत में रेपो रेट स्थिर रहने का मतलब है कि वहां कर्ज की दरें फिलहाल नहीं बढ़ेंगी, जो उन अनिवासी भारतीयों (NRIs) के लिए राहत की बात है जिन्होंने भारत में रियल एस्टेट या अन्य क्षेत्रों में निवेश किया हुआ है। इसके अतिरिक्त, डॉलर और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिरता भी भारतीय प्रवासियों के प्रेषण (remittances) के निर्णयों को प्रभावित करती है।
बैठक के दौरान यह भी चर्चा हुई कि वैश्विक स्तर पर वित्तीय बाजार अस्थिर हैं। विकसित देशों में ब्याज दरों के ऊंचे स्तर पर रहने से उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए चुनौतियां पैदा हो रही हैं। हालांकि, भारत की जीडीपी विकास दर अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में बेहतर बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक महंगाई पूरी तरह से नियंत्रण में नहीं आ जाती, तब तक आरबीआई ब्याज दरों में कटौती की जल्दबाजी नहीं करेगा।
संजय मल्होत्रा ने विश्वास जताया कि घरेलू मांग में मजबूती और सरकार के बुनियादी ढांचे पर खर्च से आर्थिक गति बनी रहेगी। उन्होंने कहा कि समिति विकास को गति देने के साथ-साथ मूल्य स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। आने वाले महीनों में मानसून की स्थिति और वैश्विक राजनीतिक हालात यह तय करेंगे कि आरबीआई की अगली चाल क्या होगी। भारत के इस आर्थिक रुख पर सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में बैठे उन निवेशकों की भी नजर है जो भारतीय बाजार में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहते हैं।
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