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भारत-माली आर्थिक संबंधों का नया अध्याय: पहले बिजनेस फोरम का सफल आयोजन
ICN24 Newsroom 5 जुल॰ 2026, 01:31 am

भारत और माली ने अपने द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को मजबूत करने के लिए पहले 'इंडिया-माली फोरम' का आयोजन किया, जिसका उद्देश्य व्यापार और निवेश को नई ऊंचाइयों पर ले जाना है।
भारत और माली के बीच द्विपक्षीय आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को एक नई दिशा देने के उद्देश्य से 'पहले इंडिया-माली बिजनेस फोरम' का ऐतिहासिक आयोजन किया गया। यह पहल दोनों देशों के बीच व्यापारिक बाधाओं को दूर करने और निर्यात क्षमता को बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में उभरी है। नई दिल्ली और बमाको के बीच बढ़ते राजनयिक तालमेल के बीच, इस फोरम का मुख्य उद्देश्य कृषि, बुनियादी ढांचे, ऊर्जा और स्वास्थ्य सेवा जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग को सुदृढ़ करना है।
इस उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान, भारतीय पक्ष ने माली की विकास यात्रा में एक विश्वसनीय भागीदार बनने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया। भारत लंबे समय से 'लाइन ऑफ क्रेडिट' (LoC) के माध्यम से माली में विभिन्न विकास परियोजनाओं का समर्थन करता रहा है। अब, इस नए बिजनेस फोरम के माध्यम से, दोनों देशों का ध्यान सरकारी स्तर के सहयोग से आगे बढ़कर निजी क्षेत्र के निवेश को प्रोत्साहित करने पर है। विशेषज्ञों का मानना है कि माली जैसे संसाधन-संपन्न राष्ट्र के साथ भारत की साझेदारी 'ग्लोबल साउथ' (वैश्विक दक्षिण) के नेतृत्व की भारत की रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
भारत और माली के बीच व्यापारिक संतुलन वर्तमान में भारत के पक्ष में है, जिसमें फार्मास्यूटिकल्स, मशीनरी और खाद्यान्न मुख्य निर्यात वस्तुएं हैं। इस फोरम में भारतीय निर्यातकों को माली के बाजार की बारीकियों को समझने का अवसर मिला, जबकि माली के प्रतिनिधियों ने अपने देश में उपलब्ध निवेश की संभावनाओं, विशेषकर खनिज और कपास प्रसंस्करण उद्योगों में, का प्रदर्शन किया। यह मंच न केवल व्यापारिक सौदों के लिए था, बल्कि दोनों देशों के उद्यमियों के बीच विश्वास बहाली का भी एक माध्यम बना।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय और व्यापारिक जगत के लिए यह विकास विशेष रूप से प्रासंगिक है। ऑस्ट्रेलिया की कई खनन कंपनियां पश्चिम अफ्रीका में सक्रिय हैं, और भारत का वहां बढ़ता आर्थिक प्रभाव त्रिकोणीय सहयोग की नई संभावनाएं खोल सकता है। सिडनी और मेलबर्न में स्थित भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई उद्यमी, जो अंतरराष्ट्रीय व्यापार और रसद (logistics) में विशेषज्ञता रखते हैं, भारत की इस विस्तारित वैश्विक पहुंच का लाभ उठा सकते हैं।
आने वाले समय में, यह फोरम एक वार्षिक कार्यक्रम का रूप ले सकता है, जिससे भारत की 'अफ्रीका आउटरीच' नीति को और बल मिलेगा। माली के साथ यह प्रगाढ़ता न केवल द्विपक्षीय लाभ के लिए है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय मंच पर अफ्रीका के प्रति भारत के रणनीतिक दृष्टिकोण को भी स्पष्ट करती है। शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में भी दोनों देशों ने भविष्य में साथ मिलकर काम करने की इच्छा जताई है, जिससे माली की युवा आबादी को भारतीय तकनीकी विशेषज्ञता का लाभ मिल सके।
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