राजनीति
दतिया उपचुनाव: इंदौर जैसी घटना का डर, फूंक-फूंक कर कदम रख रही कांग्रेस
ICN24 Newsroom 5 जुल॰ 2026, 09:31 am

मध्य प्रदेश के आगामी उपचुनावों को लेकर कांग्रेस पार्टी सतर्क है, जहां इंदौर की तरह अंतिम समय में नामांकन वापसी या रद्दीकरण के डर से रणनीति बदली जा रही है।
मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर सरगर्मी तेज हो गई है। कांग्रेस पार्टी आगामी उपचुनावों, विशेषकर दतिया विधानसभा क्षेत्र को लेकर अत्यधिक सावधानी बरत रही है। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को डर है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) एक बार फिर 'इंदौर जैसा घटनाक्रम' दोहरा सकती है, जिसने पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस को बिना किसी उम्मीदवार के छोड़ दिया था।
पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार, हाल ही में राज्यसभा उम्मीदवार के नामांकन के अनुचित रद्दीकरण ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सत्ताधारी दल चुनावों में बढ़त हासिल करने के लिए किसी भी हद तक जा सकता है। इस घटना ने कांग्रेस के भीतर खतरे की घंटी बजा दी है। वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि भाजपा की रणनीति अब केवल चुनावी मैदान में मुकाबला करने तक सीमित नहीं है, बल्कि वह नामांकन प्रक्रिया के दौरान ही विपक्ष को बाहर करने की कोशिश कर रही है।
दतिया में होने वाले उपचुनाव के लिए कांग्रेस अब एक बहुस्तरीय योजना पर काम कर रही है। इसमें न केवल मुख्य उम्मीदवार का चयन सोच-समझकर किया जा रहा है, बल्कि 'डमी' या वैकल्पिक उम्मीदवारों की एक फौज भी तैयार रखी जा रही है ताकि यदि किसी कारणवश मुख्य नामांकन रद्द होता है, तो पार्टी का प्रतिनिधित्व बना रहे। यह सतर्कता उस कड़वे अनुभव का परिणाम है जब इंदौर में कांग्रेस उम्मीदवार अक्षय कांति बम ने नाम वापसी के अंतिम दिन अपना नामांकन वापस ले लिया था और भाजपा में शामिल हो गए थे।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए, विशेषकर जो मध्य प्रदेश से ताल्लुक रखते हैं, राज्य की यह राजनीतिक अस्थिरता चर्चा का विषय बनी हुई है। सिडनी और मेलबर्न में रह रहे प्रवासी भारतीय अक्सर भारत में लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की मजबूती पर चर्चा करते हैं। नामांकन रद्द होने और दलबदल जैसी घटनाएं प्रवासी भारतीयों के बीच भारतीय चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर चिंता पैदा करती हैं।
पार्टी सूत्रों का कहना है कि इस बार कानूनी विशेषज्ञों की एक टीम नामांकन पत्रों की जांच करेगी। कांग्रेस यह सुनिश्चित करना चाहती है कि तकनीकी आधार पर किसी भी उम्मीदवार का पर्चा खारिज न हो पाए। प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने जिला स्तर के कार्यकर्ताओं को भी निर्देश दिए हैं कि वे प्रतिद्वंद्वी खेमे की हर गतिविधि पर पैनी नजर रखें। भाजपा की ओर से संभावित 'ऑपरेशन लोटस' के डर से पार्टी अपने संभावित उम्मीदवारों की सुरक्षा और उनकी वफादारी की भी निरंतर समीक्षा कर रही है।
अंततः, दतिया का यह चुनाव केवल एक सीट का मुकाबला नहीं है, बल्कि कांग्रेस के लिए अपनी संगठनात्मक क्षमता और भाजपा की रणनीतियों के खिलाफ टिके रहने की परीक्षा है। आगामी कुछ हफ़्तों में यह स्पष्ट हो जाएगा कि कांग्रेस की यह 'अति-सावधानी' उसे चुनावी मैदान में कितनी मजबूती प्रदान करती है।
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