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राजा रघुवंशी हत्याकांड: पत्नी सोनम ने सुप्रीम कोर्ट में खुद को बताया बेगुनाह, कहा- 'मुझे फंसाया गया है'
ICN24 Newsroom 9 जुल॰ 2026, 04:31 pm

राजा रघुवंशी मर्डर केस की मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर अपनी बेगुनाही का दावा किया है। उन्होंने मामले को केवल शक पर आधारित बताया है।
भारत की शीर्ष अदालत में एक महत्वपूर्ण मोड़ पर, राजा रघुवंशी हत्याकांड की मुख्य आरोपी और मृतक की पत्नी, सोनम रघुवंशी ने अपनी बेगुनाही का पुरजोर दावा किया है। सोनम ने सुप्रीम कोर्ट में एक औपचारिक हलफनामा दाखिल करते हुए कहा है कि उनके खिलाफ पूरा मामला केवल 'परिस्थितिजन्य साक्ष्यों' (circumstantial evidence) पर टिका है और उनके खिलाफ कोई भी सीधा सबूत मौजूद नहीं है। इस हाई-प्रोफाइल मामले की अगली सुनवाई गुरुवार को होने वाली है, जिस पर कानूनी विशेषज्ञों और भारतीय समुदाय की नजरें टिकी हुई हैं।
सोनम रघुवंशी ने अपने हलफनामे में तर्क दिया है कि अभियोजन पक्ष उनके खिलाफ कोई ठोस गवाह या प्रत्यक्ष प्रमाण पेश करने में विफल रहा है। उन्होंने शीर्ष अदालत को बताया कि जांच एजेंसियों ने उन्हें केवल संदेह के आधार पर इस जघन्य अपराध में फंसाया है। सोनम का कहना है कि उनके और उनके पति के बीच के रिश्तों को लेकर बनाई गई थ्योरी पूरी तरह काल्पनिक है और इसका हकीकत से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने अदालत से न्याय की गुहार लगाते हुए कहा है कि उन्हें बिना किसी ठोस आधार के जेल में रखना उनके संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है।
यह मामला भारत के साथ-साथ विदेशों में रहने वाले भारतीय समुदायों, विशेषकर ऑस्ट्रेलिया में बसे प्रवासियों के बीच भी चर्चा का विषय रहा है। अक्सर देखा गया है कि भारत में होने वाले ऐसे आपराधिक मामले प्रवासी भारतीयों (NRIs) के बीच गहरे प्रभाव डालते हैं, क्योंकि कई परिवारों के कानूनी और सामाजिक संबंध आज भी अपनी मातृभूमि से गहराई से जुड़े हुए हैं। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय मूल के लोग अक्सर भारत की न्याय प्रणाली और वहां चल रहे बड़े मुकदमों को बारीकी से ट्रैक करते हैं, क्योंकि कानूनी मिसालें और पारिवारिक विवादों के निपटारे प्रवासी समुदायों के लिए भी महत्वपूर्ण सबक होते हैं।
कानूनी जानकारों का मानना है कि 'परिस्थितिजन्य साक्ष्य' पर आधारित मामलों में दोषसिद्धि हासिल करना अभियोजन पक्ष के लिए एक बड़ी चुनौती होती है। भारतीय कानून के अनुसार, जब कोई मामला पूरी तरह से परिस्थितियों पर निर्भर होता है, तो साक्ष्यों की कड़ी इतनी मजबूत होनी चाहिए कि उसमें आरोपी के निर्दोष होने की कोई भी गुंजाइश न बचे। सोनम के वकीलों का कहना है कि पुलिस द्वारा पेश की गई साक्ष्यों की कड़ी में कई खामियां हैं, जिसका लाभ उनकी मुवक्किल को मिलना चाहिए।
गुरुवार को होने वाली सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट इस बात पर विचार करेगा कि क्या सोनम रघुवंशी के खिलाफ लगाए गए आरोपों में पर्याप्त दम है या नहीं। यदि अदालत को लगता है कि साक्ष्य कमजोर हैं, तो इससे मामले की दिशा पूरी तरह बदल सकती है। फिलहाल, सोनम के इस हलफनामे ने जांच एजेंसियों पर भी दबाव बना दिया है, जिन्हें अब अदालत के समक्ष यह सिद्ध करना होगा कि उनके पास केवल थ्योरी नहीं, बल्कि ठोस प्रमाण भी हैं।
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