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प्रिकोल ने अनुसंधान और विकास (R&D) पर निवेश बढ़ाया, ऑटोमोटिव बाजार में बनाई अपनी धाक

ICN24 Newsroom 14 जुल॰ 2026, 10:31 am
प्रिकोल ने अनुसंधान और विकास (R&D) पर निवेश बढ़ाया, ऑटोमोटिव बाजार में बनाई अपनी धाक

प्रिकोल अपनी कुल आय का 3% अनुसंधान पर खर्च कर रहा है, जिससे ड्राइवर सूचना प्रणालियों में उसकी बाजार हिस्सेदारी बढ़कर 60% तक पहुंच गई है।

भारतीय ऑटोमोटिव कंपोनेंट उद्योग की दिग्गज कंपनी प्रिकोल (Pricol) ने बाजार में अपनी बढ़त को और मजबूत करने के लिए एक दूरगामी रणनीति अपनाई है। कंपनी ने अपने अनुसंधान और विकास (R&D) खर्च को अपनी कुल आय के लगभग 3 प्रतिशत पर स्थिर रखा है, जो इसके प्रतिस्पर्धियों की तुलना में काफी अधिक है। यह कदम विशेष रूप से 'ड्राइवर इंफॉर्मेशन सिस्टम्स' (DIS) के क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए उठाया गया है। कंपनी के हालिया वित्तीय आंकड़ों और रणनीतिक रिपोर्टों के अनुसार, प्रिकोल ने वित्त वर्ष 2023 से 2026 के बीच अपने राजस्व को दोगुना करने का लक्ष्य रखा है और वह इस पथ पर मजबूती से आगे बढ़ रही है। वर्तमान में, भारतीय क्लस्टर बाजार में कंपनी की हिस्सेदारी लगभग 55-60 प्रतिशत है, जो इसे इस क्षेत्र का एक निर्विवाद नेता बनाती है। यह सफलता केवल उत्पादन क्षमता बढ़ाने से नहीं, बल्कि तकनीकी रूप से उन्नत समाधान प्रदान करने से आई है। प्रिकोल का ध्यान अब पारंपरिक मैकेनिकल डैशबोर्ड से हटकर अगली पीढ़ी के डिजिटल और स्मार्ट इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर्स पर है। जैसे-जैसे दुनिया इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की ओर बढ़ रही है, ड्राइवर सूचना प्रणालियों की भूमिका जटिल और महत्वपूर्ण होती जा रही है। प्रिकोल का R&D निवेश इन्हीं उभरती जरूरतों को पूरा करने के लिए समर्पित है। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय मूल के पेशेवरों और निवेशकों के लिए यह खबर भारत की तकनीकी प्रगति का एक बड़ा संकेत है। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच बढ़ते व्यापारिक संबंधों, विशेष रूप से आर्थिक सहयोग और व्यापार समझौते (ECTA) के तहत, भारतीय ऑटोमोटिव क्षेत्र के नवाचार वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया में भारतीय इंजीनियरों और ऑटो विशेषज्ञों का एक बड़ा समुदाय है जो भारत की इस बढ़ती विनिर्माण क्षमता को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के एक विश्वसनीय विकल्प के रूप में देख रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रिकोल की यह रणनीति न केवल घरेलू बाजार में उसकी स्थिति सुरक्षित करेगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारतीय ब्रांडों की विश्वसनीयता बढ़ाएगी। R&D पर निरंतर खर्च यह सुनिश्चित करता है कि कंपनी भविष्य की चुनौतियों, जैसे कि आपूर्ति श्रृंखला में बदलाव और नई तकनीकी प्रवृत्तियों के लिए पहले से तैयार रहे। भारत सरकार की 'मेक इन इंडिया' और 'पीएलआई' (PLI) योजनाओं के समर्थन के साथ, प्रिकोल जैसी कंपनियां अब वैश्विक मंच पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए तैयार हैं।
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