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यमन में हूती विद्रोहियों पर हमलों के लिए सऊदी क्राउन प्रिंस को मिला ट्रंप का समर्थन: रिपोर्ट

ICN24 Newsroom 14 जुल॰ 2026, 09:31 am
यमन में हूती विद्रोहियों पर हमलों के लिए सऊदी क्राउन प्रिंस को मिला ट्रंप का समर्थन: रिपोर्ट

सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने यमन में हूती विद्रोहियों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू करने से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से चर्चा की और उनका समर्थन हासिल किया।

सऊदी अरब और यमन के बीच जारी संघर्ष में एक नया और महत्वपूर्ण मोड़ सामने आया है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) ने यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के खिलाफ सैन्य हमले शुरू करने से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का सीधा समर्थन प्राप्त किया था। यह घटनाक्रम मध्य-पूर्व में अमेरिका और सऊदी अरब के बीच गहरे रणनीतिक सहयोग को दर्शाता है, जिसका असर वैश्विक राजनीति और सुरक्षा पर पड़ना तय है। रिपोर्ट के मुताबिक, रियाद ने यमन में हूतियों के खिलाफ नए सिरे से अभियान चलाने का निर्णय तब लिया जब एक ईरानी विमान के सना हवाई अड्डे पर उतरने को लेकर विवाद बढ़ गया। सऊदी अरब ने इस उड़ान को अपनी सुरक्षा के लिए खतरा और ईरान द्वारा हूतियों को सीधी मदद पहुँचाने की कोशिश के रूप में देखा। क्राउन प्रिंस ने इस मुद्दे पर वाशिंगटन से संपर्क साधा, जहाँ राष्ट्रपति ट्रंप ने सऊदी अरब की चिंताओं को समझते हुए उन्हें सैन्य कार्रवाई के लिए हरी झंडी दे दी। ट्रंप प्रशासन का यह रुख ओबामा युग की तुलना में अधिक आक्रामक माना जा रहा है, जिसने क्षेत्र में ईरान के प्रभाव को कम करने की सऊदी कोशिशों को बल दिया है। सऊदी वायुसेना ने इसके तुरंत बाद सना हवाई अड्डे को निशाना बनाया, जहाँ ईरानी विमान के उतरने की सूचना मिली थी। इस हमले का उद्देश्य हूतियों की रसद आपूर्ति को काटना और उनके नियंत्रण वाले क्षेत्रों पर दबाव बनाना था। हालांकि, हूती विद्रोहियों ने भी इस कार्रवाई का कड़ा जवाब दिया। उन्होंने सऊदी अरब के दक्षिण-पश्चिमी शहर अभा (Abha) के नागरिक हवाई अड्डे पर ड्रोन और मिसाइलों से हमला किया। इस जवाबी कार्रवाई ने युद्ध के बढ़ते दायरे और नागरिक बुनियादी ढांचों के खतरे को उजागर कर दिया है। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए यह संघर्ष विशेष चिंता का विषय है। खाड़ी देशों में लाखों भारतीय प्रवासी काम करते हैं और इस क्षेत्र में अस्थिरता सीधे तौर पर उनकी सुरक्षा और प्रेषण (remittances) को प्रभावित करती है। इसके अलावा, मध्य-पूर्व में बढ़ता तनाव वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता पैदा करता है, जिसका सीधा असर ऑस्ट्रेलिया में ईंधन की कीमतों और महंगाई पर पड़ता है। ऑस्ट्रेलिया के लिए, जो ऊर्जा आयात और क्षेत्रीय स्थिरता पर निर्भर है, सऊदी-यमन संघर्ष एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक चुनौती बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप के समर्थन ने सऊदी अरब को यमन में अधिक मुखर होने का आत्मविश्वास दिया है। हालांकि, मानवाधिकार संगठनों ने इस युद्ध के कारण होने वाली मानवीय त्रासदी पर गहरी चिंता जताई है। फिलहाल, क्षेत्र में शांति की संभावनाएं कम नजर आ रही हैं क्योंकि दोनों पक्ष अपनी-अपनी सैन्य स्थिति को मजबूत करने में जुटे हुए हैं।
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