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विधायक कमलेश्वर डोडियार का बड़ा फैसला: अगले 10 महीने तक नहीं लेंगे सैलरी, पढ़ाई के लिए छोड़ा सरकारी वेतन

ICN24 Newsroom 14 जुल॰ 2026, 02:31 am
विधायक कमलेश्वर डोडियार का बड़ा फैसला: अगले 10 महीने तक नहीं लेंगे सैलरी, पढ़ाई के लिए छोड़ा सरकारी वेतन

सैलाना विधायक कमलेश्वर डोडियार ने उच्च शिक्षा के लिए एक अनूठी मिसाल पेश की है। उन्होंने एलएलएम की पढ़ाई के दौरान अगले 10 महीनों तक अपना वेतन और भत्ते न लेने का फैसला किया है।

मध्य प्रदेश की राजनीति में अपनी सादगी और संघर्ष के लिए पहचाने जाने वाले सैलाना विधानसभा क्षेत्र के विधायक कमलेश्वर डोडियार ने एक ऐसा कदम उठाया है, जिसने देश भर के राजनीतिक गलियारों में चर्चा छेड़ दी है। भारत आदिवासी पार्टी (BAP) के इकलौते विधायक डोडियार ने घोषणा की है कि वे अगले 10 महीनों तक अपनी विधायक निधि से मिलने वाला वेतन और भत्ते स्वीकार नहीं करेंगे। इस संबंध में उन्होंने मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर को औपचारिक पत्र भी लिख दिया है। विधायक डोडियार के इस फैसले के पीछे की वजह उनका शिक्षा के प्रति समर्पण है। उन्होंने हाल ही में भोपाल स्थित प्रतिष्ठित नेशनल लॉ इंस्टीट्यूट यूनिवर्सिटी (NLIU) में एलएलएम (LLM) कोर्स में एक नियमित छात्र के रूप में दाखिला लिया है। अकादमिक नियमों के अनुसार, एक नियमित छात्र होने के नाते उन्हें विश्वविद्यालय में उपस्थिति दर्ज करानी होगी और पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करना होगा। डोडियार का मानना है कि चूंकि वे इस अवधि के दौरान एक छात्र के रूप में समय बिताएंगे, इसलिए नैतिकता के आधार पर उन्हें जनता के पैसे से वेतन लेने का अधिकार नहीं है। विधानसभा अध्यक्ष को लिखे पत्र में कमलेश्वर डोडियार ने स्पष्ट किया कि वे अपनी कानूनी समझ को बेहतर बनाने के लिए यह उच्च शिक्षा प्राप्त करना चाहते हैं, ताकि भविष्य में वे अपने क्षेत्र की जनता और आदिवासियों के अधिकारों की लड़ाई को और अधिक प्रभावी ढंग से लड़ सकें। उन्होंने पत्र में अनुरोध किया है कि शैक्षणिक सत्र के दौरान उनका वेतन रोक दिया जाए। यह कदम भारतीय राजनीति में दुर्लभ माना जा रहा है, जहां अक्सर जनप्रतिनिधियों पर सुविधाओं के दुरुपयोग के आरोप लगते रहते हैं। कमलेश्वर डोडियार का राजनीतिक सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। रतलाम जिले की सैलाना सीट से जीतने वाले डोडियार एक बेहद साधारण परिवार से आते हैं। चुनाव प्रचार के दौरान उनकी संघर्षपूर्ण जीवन की तस्वीरें और उनकी आर्थिक स्थिति की खबरें काफी सुर्खियों में रही थीं। उन्होंने न केवल रसूखदार राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों को मात दी, बल्कि अब पद पर रहते हुए शिक्षा को प्राथमिकता देकर एक नया उदाहरण पेश किया है। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए भी यह खबर प्रेरणादायक है। प्रवासी भारतीय अक्सर भारत में जवाबदेही और शिक्षा के महत्व पर चर्चा करते हैं। डोडियार का यह फैसला यह संदेश देता है कि आधुनिक भारत के जनप्रतिनिधि न केवल शिक्षित होने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं, बल्कि वे सार्वजनिक धन के उपयोग को लेकर भी सतर्क हैं। विशेषज्ञ इसे 'नैतिक राजनीति' की ओर एक सकारात्मक बदलाव के रूप में देख रहे हैं। डोडियार के इस निर्णय की सोशल मीडिया पर भी जमकर सराहना हो रही है। लोगों का कहना है कि जब देश में कई नेता फर्जी डिग्रियों और भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे रहते हैं, ऐसे में एक विधायक का नियमित छात्र बनकर पढ़ाई करना और वेतन छोड़ना एक सराहनीय पहल है। विधानसभा सचिवालय अब इस पत्र पर तकनीकी पहलुओं पर विचार कर रहा है, लेकिन डोडियार ने अपने इस फैसले से नैतिकता का एक बड़ा पैमाना स्थापित कर दिया है।
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