ऑस्ट्रेलिया
पॉलीन हैनसन का 'ऑस्ट्रेलियाई मोनोकल्चर' पर बयान, विपक्षी गठबंधन ने बुजुर्गों की देखभाल प्रणाली में बदलाव की उठाई मांग
ICN24 Newsroom 24 जून 2026, 06:25 pm

ऑस्ट्रेलियाई राजनीति में सांस्कृतिक पहचान और बुजुर्गों की देखभाल के मुद्दों ने तूल पकड़ लिया है। जहाँ पॉलीन हैनसन ने पुरानी ऑस्ट्रेलियाई पहचान का समर्थन किया, वहीं विपक्षी दल ने 'एज्ड केयर' सुधार के लिए विधेयक पेश किया।
ऑस्ट्रेलियाई संसद में आज एक ओर जहाँ देश की सांस्कृतिक पहचान को लेकर बहस छिड़ी, वहीं दूसरी ओर बुजुर्गों की देखभाल (Aged Care) से जुड़ी नीतियों में सुधार के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए गए। वन नेशन पार्टी की नेता सीनेटर पॉलीन हैनसन ने पॉल होगन और नॉर्मन गनस्टन जैसे किरदारों को ऑस्ट्रेलियाई 'मोनोकल्चर' (एकल संस्कृति) का अनिवार्य हिस्सा बताया। हैनसन का यह बयान ऐसे समय में आया है जब ऑस्ट्रेलिया अपनी बहुसांस्कृतिक पहचान को लेकर निरंतर चर्चा कर रहा है। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए यह बहस महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह देश की बदलती जनसांख्यिकी और समावेशिता के भविष्य को प्रभावित करती है।
पॉलीन हैनसन ने तर्क दिया कि पुराने दौर के ये टीवी और फिल्मी सितारे उस 'सच्ची' ऑस्ट्रेलियाई संस्कृति का प्रतिनिधित्व करते हैं जिसे संरक्षित किया जाना चाहिए। हालांकि, आलोचकों का मानना है कि 'मोनोकल्चर' शब्द का उपयोग आज के उस आधुनिक ऑस्ट्रेलिया की अनदेखी करता है, जहाँ भारत सहित दुनिया भर के देशों से आए लोग यहाँ की अर्थव्यवस्था और समाज का अभिन्न अंग बन चुके हैं। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में बसने वाले भारतीय मूल के प्रवासियों के लिए, ऑस्ट्रेलिया की पहचान अब केवल पुरानी फिल्मों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक विविध और साझा संस्कृति का नाम है।
राजनीतिक मोर्चे पर, छाया स्वास्थ्य और वृद्ध देखभाल मंत्री ऐनी रस्टन ने सरकार के विवादास्पद 'इंटीग्रेटेड असेसमेंट टूल' (एकीकृत मूल्यांकन उपकरण) को बदलने के लिए एक निजी सदस्य विधेयक (Private Member’s Bill) पेश करने की घोषणा की है। रस्टन का प्रस्ताव बुजुर्गों की देखभाल के लिए किए जाने वाले मूल्यांकनों में मानवीय हस्तक्षेप को फिर से बहाल करने पर केंद्रित है। वर्तमान प्रणाली में एल्गोरिदम और डिजिटल टूल पर अधिक निर्भरता है, जिससे कई बार गलतियां होने की संभावना बनी रहती है।
ऐनी रस्टन ने कहा कि उनके विधेयक के तीन मुख्य उद्देश्य हैं। सबसे पहले, एक मानव मूल्यांकनकर्ता के विवेक को बहाल करना ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि एल्गोरिदम अपनी गणना में कोई त्रुटि न करे। दूसरा, पेशेवर निर्णय को महत्व देना और तीसरा, यह सुनिश्चित करना कि बुजुर्गों को उनकी वास्तविक आवश्यकताओं के आधार पर सहायता मिले। यह मुद्दा भारतीय समुदाय के लिए विशेष रूप से संवेदनशील है, क्योंकि समुदाय के कई परिवार अपने बुजुर्गों की देखभाल के लिए सरकारी सहायता पर निर्भर हैं। भाषा की बाधा या सांस्कृतिक भिन्नता के कारण एल्गोरिदम अक्सर इन परिवारों की जरूरतों को समझने में विफल रह सकते हैं।
इस विधेयक का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि तकनीकी प्रणालियाँ स्वास्थ्य देखभाल पेशेवरों के अनुभव की जगह न लें। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई परिवारों में 'एजिंग इन प्लेस' (अपने घर में रहकर ही बुढ़ापा गुजारना) का चलन बढ़ रहा है, ऐसे में सटीक मूल्यांकन यह तय करता है कि किसी बुजुर्ग को घर पर कितनी सहायता मिलेगी। रस्टन के इस कदम को सरकार की वर्तमान नीतियों के खिलाफ एक बड़ी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है, जो बुजुर्गों की सुरक्षा और गरिमा से जुड़ा है।
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