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हिंसक धमकियों के बीच पॉलीन हैंसन ने की कड़ी सुरक्षा की मांग; सांसदों की सुरक्षा पर उठाए सवाल

ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 09:36 am
हिंसक धमकियों के बीच पॉलीन हैंसन ने की कड़ी सुरक्षा की मांग; सांसदों की सुरक्षा पर उठाए सवाल

वन नेशन की नेता पॉलीन हैंसन ने सांसदों को मिल रही हिंसक धमकियों के बाद ऑस्ट्रेलिया में सुरक्षा प्रोटोकॉल को कड़ा करने की वकालत की है।

ऑस्ट्रेलियाई राजनीति में बढ़ते तनाव और सांसदों को मिल रही धमकियों के बीच, वन नेशन पार्टी की नेता सीनेटर पॉलीन हैंसन ने सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक पुख्ता करने की पुरजोर मांग की है। हैंसन का यह बयान हाल के महीनों में सार्वजनिक हस्तियों और राजनीतिक कार्यालयों के खिलाफ बढ़ती आक्रामकता के बाद आया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए, तो स्थिति अनियंत्रित हो सकती है। पॉलीन हैंसन ने विशेष रूप से संघीय पुलिस (AFP) और संसदीय सुरक्षा अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान सुरक्षा ढांचा बदलती परिस्थितियों के अनुरूप पर्याप्त नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि सोशल मीडिया के माध्यम से मिल रही धमकियां अब केवल आभासी नहीं रह गई हैं, बल्कि वे वास्तविक जीवन में भी खतरा पैदा कर रही हैं। हैंसन ने जोर देकर कहा कि सांसदों को बिना किसी डर के अपना काम करने का अधिकार होना चाहिए और इसमें सुरक्षा की चूक के लिए कोई स्थान नहीं है। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए यह खबर महत्वपूर्ण है, क्योंकि राजनीतिक अस्थिरता और बढ़ती हिंसा का प्रभाव पूरे समाज पर पड़ता है। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई प्रवासी, जो ऑस्ट्रेलिया की सामाजिक और राजनीतिक संरचना में सक्रिय रूप से शामिल हैं, अक्सर सार्वजनिक विमर्श में शांति और व्यवस्था की वकालत करते रहे हैं। सुरक्षा के मुद्दे पर होने वाली यह बहस इस बात को रेखांकित करती है कि कैसे ध्रुवीकरण ऑस्ट्रेलियाई लोकतंत्र की कार्यप्रणाली को प्रभावित कर रहा है। हाल के दिनों में ऑस्ट्रेलिया के विभिन्न शहरों में राजनीतिक विरोध प्रदर्शनों का स्वरूप उग्र हुआ है। कुछ सांसदों के कार्यालयों के बाहर हिंसक झड़पें और तोड़फोड़ की घटनाएं भी दर्ज की गई हैं। हैंसन का कहना है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और विरोध के अधिकार का सम्मान होना चाहिए, लेकिन इसे हिंसा या डराने-धमकाने का जरिया नहीं बनाया जा सकता। उन्होंने सरकार से मांग की है कि सांसदों के निवास स्थान और उनके सार्वजनिक कार्यक्रमों की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त संसाधन आवंटित किए जाएं। हालांकि, कुछ आलोचकों का मानना है कि सुरक्षा बढ़ाने की यह मांग पहले से ही मौजूद व्यापक शक्तियों का विस्तार मात्र है। लेकिन हैंसन ने इन दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि सुरक्षा केवल नेताओं के लिए नहीं, बल्कि उनके साथ काम करने वाले कर्मचारियों और मिलने आने वाले आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए भी आवश्यक है। उन्होंने सुरक्षा ऑडिट की मांग की है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वर्तमान में लागू उपाय आधुनिक खतरों से निपटने में सक्षम हैं। निष्कर्ष के तौर पर, पॉलीन हैंसन की यह पहल ऑस्ट्रेलिया के राजनीतिक गलियारों में सुरक्षा और नागरिक स्वतंत्रता के बीच संतुलन पर एक नई बहस को जन्म दे सकती है। भारतीय समुदाय, जो सुरक्षा और कानून के शासन को प्राथमिकता देता है, इस घटनाक्रम पर करीब से नजर बनाए हुए है क्योंकि इसके परिणाम देश की चुनावी प्रक्रिया और सार्वजनिक सुरक्षा नीतियों को प्रभावित कर सकते हैं।
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