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आज का पंचांग 5 जुलाई 2026: रविवार के शुभ-अशुभ मुहूर्त और राहुकाल की विस्तृत जानकारी

ICN24 Newsroom 5 जुल॰ 2026, 06:31 am
आज का पंचांग 5 जुलाई 2026: रविवार के शुभ-अशुभ मुहूर्त और राहुकाल की विस्तृत जानकारी

5 जुलाई 2026 का पंचांग: जानें रविवार के शुभ मुहूर्त, राहुकाल का समय और नक्षत्रों की स्थिति।

हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत से पहले पंचांग देखने की परंपरा सदियों पुरानी है। भारतीय समुदाय, विशेष रूप से ऑस्ट्रेलिया में रह रहे प्रवासी भारतीयों के लिए अपनी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जड़ों से जुड़े रहना अत्यंत महत्वपूर्ण है। आगामी 5 जुलाई 2026, रविवार का दिन ज्योतिषीय दृष्टि से कई महत्वपूर्ण योग लेकर आ रहा है। पंचांग के अनुसार, इस दिन ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि होगी। तिथि और नक्षत्र गणना के अनुसार, 5 जुलाई को पंचमी तिथि दोपहर 01:30 बजे तक रहेगी, जिसके पश्चात षष्ठी तिथि का आगमन होगा। नक्षत्रों की बात करें तो दोपहर 03:12 बजे तक शतभिषा नक्षत्र रहेगा, उसके बाद पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र प्रारंभ हो जाएगा। रविवार का दिन होने के कारण यह समय सूर्य देव की उपासना के लिए भी श्रेष्ठ माना जाता है। सिडनी, मेलबर्न और पर्थ जैसे शहरों में रहने वाले श्रद्धालु इस समय का उपयोग अपने साप्ताहिक पूजा-पाठ के लिए कर सकते हैं। दिन के शुभ योगों की चर्चा करें तो शाम 04:39 बजे तक आयुष्मान योग रहेगा, जिसके बाद सौभाग्य योग शुरू होगा। आयुष्मान योग को स्वास्थ्य और दीर्घायु के लिए उत्तम माना जाता है, जबकि सौभाग्य योग कार्यों में सफलता और समृद्धि सुनिश्चित करता है। तैतुल करण दोपहर 01:30 बजे तक रहेगा और उसके बाद गर करण की शुरुआत होगी। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस दिन चंद्रमा कुंभ राशि में और सूर्य मिथुन राशि में विराजमान रहेंगे। किसी भी महत्वपूर्ण कार्य या निवेश के लिए 'अभिजीत मुहूर्त' को सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। 5 जुलाई को यह शुभ समय दोपहर 12:04 से दोपहर 12:59 तक रहेगा। वहीं दूसरी ओर, राहुकाल के दौरान शुभ कार्यों को टालने की सलाह दी जाती है। रविवार को राहुकाल शाम 05:40 से प्रारंभ होकर शाम 07:24 तक रहेगा। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय परिवारों को सलाह दी जाती है कि वे अपने मांगलिक कार्यों की योजना इन्हीं समयों को ध्यान में रखकर बनाएं। सूर्योदय का समय सुबह 05:39 और सूर्यास्त शाम 07:24 पर निर्धारित है। यह पंचांग विक्रम संवत 2083 और शक संवत 1948 पर आधारित है। हालांकि पंचांग की गणना सटीक होती है, लेकिन स्थान के अनुसार सूर्योदय और सूर्यास्त के समय में कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है। अतः स्थानीय परिस्थितियों और विद्वानों के परामर्श के अनुसार ही बड़े निर्णय लेना श्रेयस्कर रहता है।
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