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खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) ने 'स्मार्ट फार्मिंग' पर वैश्विक सम्मेलन की शुरुआत की; आधुनिक कृषि तकनीक को बताया भविष्य की जरूरत
ICN24 Newsroom 4 जुल॰ 2026, 11:31 pm
FAO ने स्मार्ट खेती पर वैश्विक सम्मेलन शुरू किया है, जिसमें आधुनिक तकनीक के माध्यम से कृषि उत्पादकता बढ़ाने और संसाधनों के कुशल उपयोग पर जोर दिया गया है।
संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) ने रोम में 'स्मार्ट फार्मिंग' और टिकाऊ कृषि यंत्रीकरण पर एक महत्वपूर्ण वैश्विक सम्मेलन का उद्घाटन किया है। इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य यह रेखांकित करना है कि आधुनिक कृषि तकनीक अब केवल भविष्य की कल्पना नहीं, बल्कि वर्तमान समय की एक अनिवार्य आवश्यकता बन चुकी है। बढ़ती वैश्विक आबादी और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच, खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कृषि पद्धतियों में आमूलचूल बदलाव की जरूरत है।
सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि स्मार्ट फार्मिंग के माध्यम से किसान कम संसाधनों—जैसे पानी, उर्वरक और श्रम—का उपयोग करके अधिक पैदावार प्राप्त कर सकते हैं। यह न केवल ग्रामीण विकास को गति देगा, बल्कि वैश्विक कृषि-खाद्य प्रणालियों (agrifood systems) को भी अधिक लचीला और मजबूत बनाएगा। इसमें ड्रोन तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) और डेटा एनालिटिक्स जैसी तकनीकों के एकीकरण पर चर्चा की गई, जो पारंपरिक खेती को एक आधुनिक उद्योग में बदलने की क्षमता रखती हैं।
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के लिए यह विकास विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। ऑस्ट्रेलिया के कई राज्यों, जैसे न्यू साउथ वेल्स और विक्टोरिया में बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोग बड़े पैमाने पर खेती और एग्रो-बिजनेस से जुड़े हुए हैं। ऑस्ट्रेलिया की कृषि तकनीक दुनिया में अग्रणी मानी जाती है, और भारत भी तेजी से डिजिटल कृषि की ओर बढ़ रहा है। ऐसे में यह सम्मेलन दोनों देशों के बीच ज्ञान साझा करने और 'एग्रिटेक' (Agri-tech) के क्षेत्र में सहयोग के नए अवसर पैदा कर सकता है। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई किसान इस वैश्विक बदलाव के अग्रदूत बन सकते हैं, जो आधुनिक मशीनीकरण को अपनाने में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं।
FAO के महानिदेशक के अनुसार, स्मार्ट खेती केवल बड़े खेतों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसका लाभ छोटे और सीमांत किसानों तक पहुंचना चाहिए। सम्मेलन में इस बात पर भी चिंता व्यक्त की गई कि विकासशील देशों में तकनीक की पहुंच अभी भी एक बड़ी चुनौती है। भारत जैसे देशों में, जहाँ कृषि अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, वहां स्मार्ट सिंचाई प्रणाली और मृदा स्वास्थ्य निगरानी जैसे उपकरणों का व्यापक उपयोग ग्रामीण गरीबी को कम करने में सहायक हो सकता है।
आगामी दिनों में, इस सम्मेलन में विभिन्न देशों के विशेषज्ञ, नीति निर्माता और निजी क्षेत्र के प्रतिनिधि इस बात पर मंथन करेंगे कि कैसे तकनीकी नवाचारों को किफायती और सुलभ बनाया जाए। अंततः, लक्ष्य एक ऐसी कृषि प्रणाली विकसित करना है जो न केवल पर्यावरण के अनुकूल हो, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी आर्थिक रूप से व्यवहार्य हो। ICN24 इस वैश्विक मंच पर होने वाले निर्णयों पर अपनी नजर बनाए रखेगा, क्योंकि इनका सीधा प्रभाव दुनिया भर के किसान परिवारों और खाद्य कीमतों पर पड़ेगा।
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