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नागा स्टूडेंट्स फेडरेशन ने मोइराबारी-दीमापुर ट्रेन सेवा का किया विरोध, अवैध अप्रवासन की जताई आशंका
ICN24 Newsroom 15 जून 2026, 04:01 pm

नागा स्टूडेंट्स फेडरेशन (NSF) ने असम और नागालैंड के बीच प्रस्तावित नई ट्रेन सेवा का कड़ा विरोध करते हुए इसे स्थानीय जनसांख्यिकी के लिए खतरा बताया है।
नागालैंड के प्रभावशाली छात्र संगठन, नागा स्टूडेंट्स फेडरेशन (NSF) ने असम के मोइराबारी और नागालैंड के वाणिज्यिक केंद्र दीमापुर के बीच एक नई यात्री ट्रेन सेवा शुरू करने के प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया है। फेडरेशन ने चेतावनी दी है कि इस रेल संपर्क से राज्य में अवैध अप्रवासियों की बाढ़ आ सकती है, जिससे स्थानीय स्वदेशी आबादी के अधिकारों और जनसांख्यिकीय संरचना पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे को लिखे एक औपचारिक पत्र में, एनएसएफ ने स्पष्ट किया कि मोइराबारी (असम के मोरीगांव जिले में स्थित) से दीमापुर तक सीधी ट्रेन सेवा शुरू करना नागालैंड की सुरक्षा के लिए एक बड़ा जोखिम है। छात्र निकाय का तर्क है कि इस मार्ग से बिना वैध दस्तावेजों के लोगों का प्रवेश आसान हो जाएगा, जिससे राज्य की पहले से ही संवेदनशील सुरक्षा व्यवस्था और इनर लाइन परमिट (ILP) प्रणाली पर दबाव बढ़ेगा।
एनएसएफ के अध्यक्ष मेधोवी केत्सु ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि संगठन विकास या रेल कनेक्टिविटी के खिलाफ नहीं है, लेकिन वे ऐसी किसी भी पहल का समर्थन नहीं कर सकते जो नागा लोगों के अस्तित्व और उनकी पहचान को खतरे में डालती हो। उन्होंने जोर देकर कहा कि दीमापुर पहले से ही बाहरी आबादी के भारी दबाव का सामना कर रहा है, और नई ट्रेन सेवा इस समस्या को और गंभीर बना देगी।
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में नागरिकता और पहचान के मुद्दे काफी संवेदनशील बने हुए हैं। एनएसएफ का मानना है कि पर्याप्त सुरक्षा जांच और कड़े नियमों के अभाव में, नई ट्रेन सेवा अवैध घुसपैठियों के लिए एक आसान रास्ता बन जाएगी। संगठन ने राज्य सरकार और रेलवे अधिकारियों से इस प्रस्ताव को तुरंत वापस लेने की मांग की है।
भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में चल रहे ये घटनाक्रम ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय, विशेषकर पूर्वोत्तर मूल के प्रवासियों के बीच भी चर्चा का विषय हैं। मेलबर्न और सिडनी जैसे शहरों में रहने वाले प्रवासी अक्सर अपने पैतृक राज्यों की सुरक्षा और सांस्कृतिक अखंडता को लेकर चिंता व्यक्त करते रहे हैं। जनसांख्यिकीय परिवर्तन और अवैध प्रवास के ये मुद्दे वैश्विक स्तर पर प्रवासियों के बीच सुरक्षा और नीतिगत बहस का केंद्र बने हुए हैं।
फिलहाल, नागालैंड सरकार की ओर से इस विरोध पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, छात्र संगठन ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो वे अपने विरोध को और तेज करेंगे। स्थानीय प्रशासन के लिए चुनौती यह है कि वह एक ओर कनेक्टिविटी और आर्थिक विकास को बढ़ावा दे, और दूसरी ओर स्थानीय समुदायों की सुरक्षा और पहचान संबंधी चिंताओं का समाधान करे।
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