ऑस्ट्रेलिया
ईरान में खामेनेई के निधन पर उमड़ा जनसैलाब; ट्रंप ने दिए वार्ता की जल्द बहाली के संकेत
ICN24 Newsroom 5 जुल॰ 2026, 09:31 pm
ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के निधन के बाद तेहरान में लाखों की भीड़ उमड़ी है, वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ वार्ता जल्द शुरू होने की बात कही है।
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन के बाद पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई है। तेहरान की सड़कों पर लाखों की संख्या में लोग अपने नेता को अंतिम विदाई देने के लिए एकत्र हुए हैं। यह दृश्य न केवल ईरान के आंतरिक राजनीतिक बदलाव को दर्शाता है, बल्कि वैश्विक राजनीति में भी एक बड़ी हलचल का संकेत दे रहा है। इसी बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक चौंकाने वाला बयान देते हुए कहा है कि ईरान के साथ रुकी हुई वार्ता जल्द ही फिर से शुरू हो सकती है।
तेहरान से मिल रही रिपोर्टों के अनुसार, सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी गई है और पूरे शहर में शोक का माहौल है। खामेनेई का निधन ईरान के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है, क्योंकि उन्होंने दशकों तक देश की नीतियों और पश्चिम के प्रति उसके कड़े रुख का मार्गदर्शन किया था। उनकी मृत्यु के बाद अब सत्ता के उत्तराधिकार और देश की भविष्य की दिशा को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।
वॉशिंगटन में पत्रकारों से बात करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिया कि ईरान के नेतृत्व में बदलाव के साथ ही कूटनीतिक रास्ते फिर से खुल सकते हैं। ट्रंप ने कहा, "ईरान के साथ बातचीत बहुत जल्द फिर से शुरू होने की संभावना है। हम एक ऐसा समाधान चाहते हैं जो सभी के लिए उचित हो।" यह बयान ट्रंप प्रशासन की पिछली 'मैक्सिमम प्रेशर' नीति से थोड़ा अलग नजर आ रहा है, जिससे विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य पूर्व में तनाव कम करने की नई कोशिशें शुरू हो सकती हैं।
भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए यह घटनाक्रम काफी महत्वपूर्ण है। भारत के ईरान के साथ पुराने रणनीतिक और आर्थिक संबंध रहे हैं, विशेष रूप से चाबहार बंदरगाह परियोजना के माध्यम से। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय मूल के लोग और कारोबारी इस बात पर करीब से नजर रख रहे हैं कि इन बदलावों का असर कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक व्यापार मार्गों पर क्या होगा। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में बसे प्रवासी समुदायों के बीच इस बात की चर्चा है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच संबंध सुधरते हैं, तो इसका सकारात्मक प्रभाव वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
ऑस्ट्रेलियाई विदेश मंत्रालय ने भी स्थिति पर नजर बनाए रखी है। ऑस्ट्रेलिया हमेशा से मध्य पूर्व में स्थिरता का पक्षधर रहा है और किसी भी संभावित वार्ता का स्वागत कर सकता है। हालांकि, ईरान के भीतर सत्ता संघर्ष की संभावनाओं को लेकर भी चिंताएं व्यक्त की जा रही हैं। आने वाले कुछ सप्ताह यह तय करेंगे कि ईरान अपने नए नेतृत्व के तहत कूटनीति का रास्ता चुनता है या पुरानी नीतियों पर ही कायम रहता है।
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