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ट्रम्प प्रशासन के नए नियम: विवाह आधारित ग्रीन कार्ड के लिए अब अनिवार्य साक्षात्कार और कड़ी जांच

ICN24 Newsroom 7 जुल॰ 2026, 12:31 am
ट्रम्प प्रशासन के नए नियम: विवाह आधारित ग्रीन कार्ड के लिए अब अनिवार्य साक्षात्कार और कड़ी जांच

अमेरिका में 2026 से विवाह आधारित ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया और कठिन हो गई है। नए USCIS नियमों के तहत अब सभी आवेदकों के लिए अनिवार्य इंटरव्यू और गहन जांच आवश्यक होगी।

वाशिंगटन और कैनबरा के बीच बढ़ते कूटनीतिक रिश्तों के बीच, अमेरिका में रह रहे भारतीय समुदाय और उनके अंतरराष्ट्रीय रिश्तेदारों के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। साल 2026 में ट्रम्प प्रशासन ने 'मैरिज-बेस्ड' यानी विवाह आधारित ग्रीन कार्ड प्राप्त करने की प्रक्रियाओं में आमूल-चूल परिवर्तन किए हैं। अमेरिकी नागरिकता और आव्रजन सेवा (USCIS) द्वारा लागू की गई इन नई नीतियों के तहत, अब स्थायी निवास (PR) के लिए आवेदन करने वाले प्रत्येक दंपति को अनिवार्य रूप से व्यक्तिगत साक्षात्कार (इन-पर्सन इंटरव्यू) से गुजरना होगा। पूर्व के वर्षों में, विशेष रूप से कम जोखिम वाले मामलों में, USCIS अक्सर साक्षात्कार की आवश्यकता को समाप्त कर देता था ताकि आवेदनों के बोझ को कम किया जा सके। हालांकि, नई नीति ने इस छूट को पूरी तरह खत्म कर दिया है। अब आव्रजन अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे हर मामले की सूक्ष्मता से जांच करें। इसमें न केवल विवाह की वैधता के दस्तावेजी प्रमाण मांगे जा रहे हैं, बल्कि जोड़ों के साझा वित्तीय इतिहास, सोशल मीडिया गतिविधियों और यहां तक कि उनके पड़ोसियों से मिली जानकारी का भी मिलान किया जा रहा है। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए यह घटनाक्रम विशेष रूप से चिंताजनक है। सिडनी और मेलबर्न में बसे कई भारतीय परिवारों के सदस्य अमेरिका में कार्यरत हैं या वहां बसने की योजना बना रहे हैं। आव्रजन विशेषज्ञों का मानना है कि इन कड़े नियमों का सीधा असर 'ट्रांस-कॉन्टिनेंटल' परिवारों पर पड़ेगा। उदाहरण के तौर पर, यदि कोई भारतीय मूल का ऑस्ट्रेलियाई नागरिक किसी अमेरिकी नागरिक से विवाह करता है, तो अब उसे ग्रीन कार्ड प्राप्त करने के लिए पहले से कहीं अधिक लंबी प्रतीक्षा अवधि और कठोर कानूनी प्रक्रिया का सामना करना होगा। विशेषज्ञों के अनुसार, इन नए नियमों का उद्देश्य 'मैरिज फ्रॉड' या फर्जी शादियों को रोकना है, लेकिन इसके कारण वास्तविक जोड़ों को भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। गहन जांच (Enhanced Vetting) की प्रक्रिया में अब डिजिटल फुटप्रिंट्स की भी जांच शामिल है। इसका अर्थ यह है कि आवेदकों के निजी संदेशों और सार्वजनिक पोस्टों की समीक्षा की जा सकती है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उनका रिश्ता केवल कागजी नहीं है। भारत और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से आने वाले प्रवासियों के लिए यह बदलाव एक नई चुनौती पेश करता है। जहां ऑस्ट्रेलिया में 'पार्टनर वीजा' की प्रक्रिया पहले से ही काफी सख्त और महंगी मानी जाती है, वहीं अब अमेरिका के इन नए नियमों ने वैश्विक स्तर पर प्रवासन को और अधिक जटिल बना दिया है। आव्रजन वकीलों ने सलाह दी है कि आवेदन करते समय अब दस्तावेजों की शुद्धता और पारदर्शिता पर पहले से कहीं अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है, क्योंकि एक छोटी सी विसंगति भी आवेदन को रद्द करने या लंबी देरी का कारण बन सकती है।
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