राजनीति
महाराष्ट्र: मुख्यमंत्री की शक्तियों में बड़ा इजाफा, अब मंत्रियों के फैसलों को बदल सकेंगे देवेंद्र फडणवीस
ICN24 Newsroom 19 अग॰ 2026, 08:37 pm

महाराष्ट्र सरकार ने कार्य संचालन नियमों में बदलाव कर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को मंत्रियों के फैसलों को बदलने या रद्द करने का विशेष अधिकार दिया है।
महाराष्ट्र की राजनीति में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक बदलाव के तहत मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की शक्तियों को व्यापक रूप से बढ़ा दिया गया है। राज्य सरकार द्वारा जारी नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, मुख्यमंत्री के पास अब यह अधिकार होगा कि वे कैबिनेट मंत्रियों द्वारा लिए गए किसी भी फैसले की समीक्षा कर सकें, उसमें संशोधन कर सकें या जरूरत पड़ने पर उसे पूरी तरह से रद्द कर सकें। इस कदम को राज्य में सत्ता के केंद्रीकरण और शासन प्रक्रिया को अधिक सुव्यवस्थित करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
महाराष्ट्र सरकार के 'कार्य संचालन नियमों' (Rules of Business) में किए गए इस संशोधन के बाद अब किसी भी विभाग का मंत्री स्वतंत्र रूप से अंतिम फैसला नहीं ले पाएगा, यदि मुख्यमंत्री उस पर पुनर्विचार करना चाहें। इससे पहले, सामान्य प्रक्रिया में मंत्रियों के पास अपने विभाग से जुड़े नीतिगत निर्णयों पर काफी स्वायत्तता होती थी। हालांकि, अब अहम फाइलों और नीतिगत बदलावों पर मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) का सीधा नियंत्रण और अधिक प्रभावी हो जाएगा। यह बदलाव विशेष रूप से गठबंधन सरकार (महायुति) के भीतर समन्वय को बेहतर बनाने के उद्देश्य से किया गया बताया जा रहा है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस निर्णय के पीछे मुख्य कारण विभिन्न विभागों के बीच होने वाले विरोधाभासों को रोकना है। अक्सर गठबंधन सरकारों में अलग-अलग दलों के मंत्रियों के बीच नीतिगत मतभेद देखे जाते हैं। अब मुख्यमंत्री को मिली इस वीटो पावर से सरकार के भीतर एकरूपता सुनिश्चित की जा सकेगी। हालांकि, विपक्षी दलों ने इस कदम की आलोचना करते हुए इसे 'लोकतांत्रिक मर्यादाओं का उल्लंघन' बताया है। विपक्ष का तर्क है कि इससे मंत्रियों की जवाबदेही कम होगी और पूरी कैबिनेट केवल मुख्यमंत्री के निर्देशों पर निर्भर हो जाएगी।
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय, विशेष रूप से महाराष्ट्र से ताल्लुक रखने वाले प्रवासियों के लिए यह खबर महत्वपूर्ण है। महाराष्ट्र भारत का आर्थिक पावरहाउस है और सिडनी, मेलबर्न एवं पर्थ जैसे शहरों में रहने वाले कई अनिवासी भारतीय (NRIs) महाराष्ट्र में बड़े निवेश और स्टार्टअप्स से जुड़े हैं। शासन व्यवस्था में इस तरह के बदलावों का सीधा असर राज्य की व्यापारिक सुगमता (Ease of Doing Business) और भविष्य की निवेश नीतियों पर पड़ता है। ऑस्ट्रेलिया-भारत आर्थिक सहयोग समझौते के बाद से महाराष्ट्र के बुनियादी ढांचे और आईटी क्षेत्र में विदेशी निवेश बढ़ रहा है, ऐसे में मुख्यमंत्री का मजबूत नियंत्रण नीतियों में स्थिरता ला सकता है।
प्रशासनिक स्तर पर इस बदलाव का मतलब है कि अब विकास परियोजनाओं और बजटीय आवंटन से जुड़ी फाइलों को मुख्यमंत्री की अंतिम मंजूरी के बिना अंतिम रूप देना मुश्किल होगा। यह न केवल प्रशासनिक गति को प्रभावित कर सकता है, बल्कि यह भी तय करेगा कि राज्य की बड़ी परियोजनाओं की दिशा क्या होगी। आने वाले हफ्तों में यह देखना दिलचस्प होगा कि कैबिनेट के अन्य वरिष्ठ नेता और गठबंधन सहयोगी इस नई व्यवस्था के साथ किस तरह सामंजस्य बिठाते हैं।
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