राजनीति
हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला: अब बेटियों के बच्चों को भी मिलेगा स्टैम्प ड्यूटी में छूट का लाभ, 12 साल का संशय खत्म
ICN24 Newsroom 19 अग॰ 2026, 09:37 pm
हरियाणा सरकार ने स्पष्ट किया है कि रक्त संबंधों में संपत्ति हस्तांतरण पर स्टैम्प ड्यूटी की छूट अब बेटियों के बच्चों पर भी समान रूप से लागू होगी।
हरियाणा सरकार ने एक महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण जारी करते हुए राज्य में संपत्ति हस्तांतरण से जुड़े एक दशक पुराने कानूनी गतिरोध को समाप्त कर दिया है। सरकार ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि 'रक्त संबंधों' (blood relations) के भीतर संपत्ति को उपहार (gift deed) के रूप में देने पर मिलने वाली स्टैम्प ड्यूटी की छूट अब बेटियों के बच्चों यानी नाती-नातिन पर भी लागू होगी। यह निर्णय उन हजारों परिवारों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है, जो पिछले 12 वर्षों से इस विसंगति के कारण कानूनी और वित्तीय परेशानियों का सामना कर रहे थे।
राजस्व और आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा जारी नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, अब बेटियों के बच्चों के पक्ष में किए गए 'गिफ्ट डीड' पर भी केवल मामूली पंजीकरण शुल्क और सेवा शुल्क ही देय होगा, न कि पूरी स्टैम्प ड्यूटी। गौरतलब है कि हरियाणा में सामान्य संपत्ति पंजीकरण पर 5 से 7 प्रतिशत तक स्टैम्प ड्यूटी लगती है, जबकि रक्त संबंधों में यह शुल्क नगण्य होता है। 2014 के एक नोटिफिकेशन के बावजूद, कई तहसीलों में अधिकारी इस छूट को केवल बेटों के बच्चों (पोता-पोती) तक सीमित मान रहे थे और बेटियों के बच्चों को 'रक्त संबंध' की श्रेणी से बाहर रख रहे थे।
इस मामले की जड़ें 2014 के उस आदेश में थीं, जिसमें माता-पिता, पति-पत्नी, बच्चों और पोते-पोतियों के बीच संपत्ति के हस्तांतरण पर स्टैम्प ड्यूटी माफ की गई थी। हालांकि, 'पोते-पोतियों' (grandchildren) शब्द की व्याख्या को लेकर क्षेत्रीय स्तर पर भारी अस्पष्टता थी। कई मामलों में उप-पंजीयक (Sub-Registrars) यह तर्क देते थे कि बेटी के बच्चे दूसरे परिवार का हिस्सा बन जाते हैं, इसलिए वे इस छूट के हकदार नहीं हैं। इस रूढ़िवादी व्याख्या के कारण कई परिवारों को उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ा था।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय, विशेष रूप से हरियाणा मूल के प्रवासियों के लिए यह खबर अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऑस्ट्रेलिया में बसे कई भारतीय अपनी पैतृक संपत्ति को अगली पीढ़ी को सौंपने की योजना बनाते हैं। अब तक, यदि कोई अनिवासी भारतीय (NRI) अपनी संपत्ति अपनी बेटी के बच्चों को देना चाहता था, तो उसे भारी भरकम टैक्स और स्टैम्प ड्यूटी का बोझ उठाना पड़ता था। इस स्पष्टीकरण के बाद, कानूनी प्रक्रिया न केवल सरल हो गई है, बल्कि आर्थिक रूप से भी सुलभ हो गई है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम लैंगिक समानता की दिशा में भी एक बड़ी जीत है। यह स्पष्ट करता है कि कानून की नजर में बेटी का वंश भी बेटे के वंश के समान ही उत्तराधिकार और लाभों का पात्र है। अब हरियाणा के सभी जिलों में इस नियम को समान रूप से लागू करने के निर्देश दे दिए गए हैं, जिससे भ्रष्टाचार और फाइलों के अटके रहने की संभावना कम होगी।
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