राजनीति
किम जोंग-उन का रूस को समर्थन: वैश्विक राजनीति में बढ़ता तनाव और ट्रंप के बदलते रुख ने बढ़ाई चिंता
ICN24 Newsroom 18 अग॰ 2026, 07:37 pm

उत्तर कोरिया और रूस के बढ़ते सैन्य संबंधों ने अमेरिका सहित नाटो देशों की नींद उड़ा दी है। जानिए ट्रंप की प्रतिक्रिया और भारत-प्रशांत क्षेत्र पर इसका प्रभाव।
उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन द्वारा रूस के प्रति बढ़ते समर्थन और सक्रिय सैन्य सहयोग ने वैश्विक भू-राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह से बदल दिया है। प्योंगयांग और मॉस्को के बीच गहराती इस नजदीकी ने न केवल अमेरिका, बल्कि जर्मनी और ब्रिटेन जैसे नाटो (NATO) सदस्य देशों के लिए गंभीर सुरक्षा चिंताएं पैदा कर दी हैं। खुफिया रिपोर्टों और हालिया कूटनीतिक गतिविधियों से संकेत मिलता है कि उत्तर कोरिया न केवल रूस को गोला-बारूद की आपूर्ति कर रहा है, बल्कि अब सीधे तौर पर सैन्य हस्तक्षेप की दिशा में भी कदम बढ़ा रहा है। यह घटनाक्रम यूक्रेन युद्ध के परिप्रेक्ष्य में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पश्चिमी देशों के रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि रूस और उत्तर कोरिया के बीच यह 'बिना सीमा वाली' रणनीतिक साझेदारी वैश्विक व्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती है। अमेरिका ने चेतावनी दी है कि किम जोंग-उन का यह कदम यूरोप के साथ-साथ एशिया-प्रशांत क्षेत्र की स्थिरता को भी खतरे में डाल सकता है। ब्रिटेन और जर्मनी ने भी अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि यदि उत्तर कोरियाई सैनिक रूस की ओर से युद्ध के मैदान में उतरते हैं, तो यह तनाव को एक नए और खतरनाक स्तर पर ले जाएगा। नाटो गठबंधन अब अपनी भविष्य की रणनीतियों पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर है।
इस बीच, पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हालिया टिप्पणियों ने इस बहस में एक नया मोड़ दे दिया है। ट्रंप, जो किम जोंग-उन के साथ अपनी ऐतिहासिक मुलाकातों और 'व्यक्तिगत केमिस्ट्री' के लिए जाने जाते हैं, अब एक अलग सुर में बात कर रहे हैं। हालांकि अतीत में उनके और किम के रिश्ते उतार-चढ़ाव भरे रहे हैं—'फायर एंड फ्यूरी' की धमकी से लेकर प्रेम पत्रों के आदान-प्रदान तक—लेकिन अब ट्रंप रूस और उत्तर कोरिया के बढ़ते प्रभाव को बाइडेन प्रशासन की कूटनीतिक विफलता के रूप में देख रहे हैं। ट्रंप का तर्क है कि उनके कार्यकाल में किम जोंग नियंत्रण में थे, लेकिन अब वैश्विक स्थितियां बेकाबू हो रही हैं।
भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए यह घटनाक्रम विशेष महत्व रखता है। ऑस्ट्रेलिया, जो क्वाड (Quad) और ऑकस (AUKUS) जैसी सुरक्षा साझेदारियों का एक प्रमुख हिस्सा है, उत्तर कोरिया की परमाणु महत्वाकांक्षाओं और रूस के साथ उसके गठबंधन पर पैनी नजर रख रहा है। हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में शक्ति संतुलन बिगड़ने का सीधा असर क्षेत्रीय व्यापार और सुरक्षा पर पड़ सकता है। यदि उत्तर कोरिया को रूस से उन्नत मिसाइल और उपग्रह तकनीक मिलती है, तो यह दक्षिण चीन सागर और ऑस्ट्रेलियाई जलक्षेत्र के निकट सुरक्षा चुनौतियों को और बढ़ा देगा।
निष्कर्षतः, किम जोंग-उन और व्लादिमीर पुतिन का यह नया सैन्य गठजोड़ केवल दो देशों के बीच का द्विपक्षीय समझौता नहीं है, बल्कि यह शीत युद्ध के बाद के अंतरराष्ट्रीय नियमों को दी गई एक खुली चुनौती है। आने वाले महीनों में वाशिंगटन और उसके सहयोगियों की प्रतिक्रिया यह निर्धारित करेगी कि दुनिया एक नए वैश्विक संघर्ष की ओर बढ़ रही है या कूटनीति के माध्यम से इस तनाव को कम किया जा सकता है।
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