राजनीति
जींद: गंगाजल से मंच 'शुद्धिकरण' के खिलाफ कांग्रेस का रोष मार्च; मल्लिकार्जुन खड़गे के अपमान का लगाया आरोप
ICN24 Newsroom 15 अग॰ 2026, 08:37 am

हरियाणा के जींद में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मंच को गंगाजल से धोने की घटना के विरोध में प्रदर्शन किया। उन्होंने इसे कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और दलित समाज का अपमान बताया है।
हरियाणा के जींद जिले में राजनीतिक माहौल उस समय गरमा गया जब कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने बड़ी संख्या में एकत्रित होकर एक रोष मार्च निकाला। यह प्रदर्शन उस कथित घटना के विरोध में था, जिसमें कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के एक कार्यक्रम के बाद मंच को गंगाजल से धोकर 'शुद्ध' किया गया था। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इस कृत्य को न केवल अपने नेता का अपमान बताया, बल्कि इसे भारतीय संविधान की मूल भावना और सामाजिक समानता के खिलाफ एक गंभीर प्रहार करार दिया।
रोष मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों ने जमकर नारेबाजी की और सत्तापक्ष पर संकीर्ण मानसिकता को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे स्थानीय कांग्रेस नेताओं ने कहा कि मल्लिकार्जुन खड़गे देश के सबसे वरिष्ठ नेताओं में से एक हैं और एक वंचित समाज से आते हैं। उनके जाने के बाद मंच को गंगाजल से पवित्र करने का अर्थ यह संदेश देना है कि उनकी उपस्थिति ने उस स्थान को 'अपवित्र' कर दिया था। कार्यकर्ताओं ने इसे सीधे तौर पर छुआछूत और जातिगत भेदभाव की वापसी के रूप में देखा है।
कांग्रेस नेताओं ने अपने संबोधन में कहा कि भारत का संविधान हर नागरिक को समानता का अधिकार देता है और छुआछूत जैसी प्रथाओं को अपराध मानता है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की घटनाएं समाज को बांटने और दलितों व पिछड़ों के स्वाभिमान को ठेस पहुंचाने के लिए की जा रही हैं। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि इस घटना के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए और सार्वजनिक रूप से माफी मांगी जानी चाहिए।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए भी यह घटना चर्चा का विषय बनी हुई है। प्रवासी भारतीयों के बीच अक्सर भारत में हो रहे सामाजिक सुधारों और जातिगत भेदभाव के मुद्दों पर गहन चर्चा होती है। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में सक्रिय कई भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई संगठनों का मानना है कि भारत की वैश्विक छवि को बनाए रखने के लिए ऐसी प्रतिगामी सोच का अंत होना आवश्यक है। सामाजिक न्याय और मानवाधिकारों की वकालत करने वाले समूहों ने इस घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि आधुनिक भारत में इस तरह के कृत्यों के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए।
प्रदर्शन के अंत में कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन को एक ज्ञापन सौंपा। इसमें चेतावनी दी गई कि यदि इस तरह की मानसिकता पर अंकुश नहीं लगाया गया, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और तेज किया जाएगा। यह घटना हरियाणा की राजनीति में एक नया मोड़ ले सकती है, क्योंकि विपक्षी दल इसे आगामी चुनावों में सामाजिक न्याय के बड़े मुद्दे के रूप में पेश करने की तैयारी में हैं।
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