राजनीति
बेंगलुरु की सड़कों पर गड्ढों का संकट: हाईकोर्ट ने नागरिक निकाय से मांगा विस्तृत जवाब
ICN24 Newsroom 15 अग॰ 2026, 08:40 am

कर्नाटक उच्च न्यायालय ने बेंगलुरु की खराब सड़कों पर संज्ञान लेते हुए नागरिक निकाय को गड्ढों की मरम्मत और रोड रखरखाव पर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है।
कर्नाटक उच्च न्यायालय ने बेंगलुरु शहर की बदहाल सड़कों और गड्ढों की समस्या पर कड़ा रुख अपनाते हुए नागरिक प्रशासन से एक विस्तृत हलफनामा (Affidavit) मांगा है। कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश विभु बाखरु और न्यायमूर्ति के.एस. हेमलेखा की खंडपीठ ने विजयन मेनन द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश जारी किए। इस याचिका में शहर की मुख्य सड़कों और संपर्क मार्गों पर बने जानलेवा गड्ढों की मरम्मत के लिए तत्काल दिशा-निर्देश देने की मांग की गई है।
अदालत ने सुनवाई के दौरान इस बात पर जोर दिया कि केवल कागजी कार्रवाई से काम नहीं चलेगा, बल्कि धरातल पर सुधार दिखना चाहिए। खंडपीठ ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वे उन सभी सड़कों की पहचान करें जहाँ गड्ढे मौजूद हैं और उनके सुधार के लिए किए जा रहे कार्यों का पूरा ब्योरा पेश करें। उच्च न्यायालय ने इस मामले में नागरिक निकाय (BBMP) से जवाबदेही तय करने को कहा है, क्योंकि पिछले कई वर्षों से मानसून के दौरान बेंगलुरु की सड़कों की स्थिति दयनीय हो जाती है, जिससे न केवल यातायात प्रभावित होता है बल्कि कई घातक दुर्घटनाएं भी होती हैं।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय, विशेष रूप से वे जो बेंगलुरु जैसे तकनीकी केंद्रों से आते हैं, के लिए यह खबर अत्यंत महत्वपूर्ण है। प्रवासी भारतीय अक्सर अपनी छुट्टियों के दौरान अपने गृहनगर जाते हैं और वहां के बुनियादी ढांचे में गिरावट को लेकर चिंतित रहते हैं। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में व्यवस्थित सड़कों और उत्कृष्ट बुनियादी ढांचे के आदि हो चुके प्रवासी भारतीयों के लिए बेंगलुरु जैसे 'भारत के सिलिकॉन वैली' की सड़कों पर यह अव्यवस्था निराशा का विषय है। कई एनआरआई (NRI) अपने बूढ़े माता-पिता और परिजनों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताते हैं, जो इन खराब सड़कों पर चलने के लिए मजबूर हैं।
याचिकाकर्ता विजयन मेनन ने अपनी दलील में कहा कि शहर के कई हिस्सों में सड़कों की हालत इतनी खराब है कि वे वाहन चलाने के लायक नहीं रह गई हैं। बार-बार शिकायत के बावजूद प्रशासन द्वारा केवल अस्थायी पैचवर्क किया जाता है, जो पहली बारिश में ही उखड़ जाता है। अदालत ने अब यह सुनिश्चित करने का बीड़ा उठाया है कि प्रशासन एक दीर्घकालिक समाधान के साथ आए।
इस मामले में अगली सुनवाई जल्द ही होने वाली है, जिसमें कोर्ट हलफनामे की समीक्षा करेगा। यदि नागरिक निकाय संतोषजनक रिपोर्ट पेश करने में विफल रहता है, तो अदालत कठोर कदम उठा सकती है। बुनियादी ढांचे की यह लड़ाई केवल एक शहर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत के शहरी नियोजन और शासन की गुणवत्ता पर एक व्यापक बहस का हिस्सा है, जिसे दुनियाभर में मौजूद भारतीय समुदाय बड़े करीब से देख रहा है।
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