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लखनऊ: केजीएमयू में पांच दिनों से सर्वर ठप, ओपीडी और ट्रॉमा सेंटर में मरीजों की बढ़ी मुश्किलें
ICN24 Newsroom 15 अग॰ 2026, 08:40 am

लखनऊ के किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में एनआईसी सर्वर में तकनीकी खराबी के चलते ओपीडी और ट्रॉमा सेंटर में स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं।
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित प्रतिष्ठित किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) में पिछले पांच दिनों से स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह चरमराई हुई हैं। नेशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर (एनआईसी) के सर्वर में आई तकनीकी खराबी के कारण सोमवार से शुरू हुई यह समस्या शुक्रवार को भी जारी रही, जिससे ओपीडी और ट्रॉमा सेंटर में आने वाले हजारों मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
केजीएमयू प्रशासन के अनुसार, सर्वर ठप होने की वजह से ऑनलाइन पंजीकरण, पैथोलॉजी रिपोर्टिंग और बिलिंग काउंटर जैसी डिजिटल सेवाएं पूरी तरह से बंद हैं। सामान्य दिनों में जहां पंजीकरण की प्रक्रिया कुछ ही मिनटों में पूरी हो जाती थी, वहीं अब अस्पताल प्रशासन को मजबूरन मैन्युअल (कागजी) तरीके से काम करना पड़ रहा है। इस धीमी प्रक्रिया के कारण ओपीडी के बाहर मरीजों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं, जिनमें कई बुजुर्ग और गंभीर रूप से बीमार मरीज भी शामिल हैं।
ट्रॉमा सेंटर की स्थिति और भी गंभीर है। यहां आपातकालीन स्थिति में आने वाले मरीजों के परिजनों को जांच रिपोर्ट और भर्ती की प्रक्रिया के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। डिजिटल सिस्टम उपलब्ध न होने के कारण डॉक्टरों को भी मरीजों के पिछले स्वास्थ्य रिकॉर्ड देखने में असुविधा हो रही है। लखनऊ और आसपास के जिलों से आए मरीज, जो अक्सर दूर-दराज के क्षेत्रों से यहां बेहतर इलाज की उम्मीद में आते हैं, वे इस तकनीकी विफलता के कारण घंटों धूप और उमस में कतारों में खड़े रहने को मजबूर हैं।
एनआईसी की तकनीकी टीम इस खराबी को ठीक करने का प्रयास कर रही है, लेकिन पांच दिन बीत जाने के बाद भी पूर्ण समाधान नहीं निकल पाया है। अस्पताल के अधिकारियों का कहना है कि वे स्थानीय स्तर पर बैकअप सिस्टम के माध्यम से भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन भारी भार के कारण मैन्युअल सिस्टम पर्याप्त साबित नहीं हो रहा है।
भारत के स्वास्थ्य ढांचे में बढ़ती डिजिटल निर्भरता के बीच इस तरह की तकनीकी विफलता एक बड़ा सवाल खड़ा करती है। ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के लोग, जिनके परिवार के सदस्य लखनऊ या आसपास के क्षेत्रों में रहते हैं, उनके लिए यह खबर चिंता का विषय है क्योंकि केजीएमयू उत्तर भारत का एक प्रमुख चिकित्सा केंद्र है। प्रवासी भारतीयों को अक्सर अपने बुजुर्ग माता-पिता की चिकित्सा जांच के लिए ऐसे संस्थानों पर निर्भर रहना पड़ता है, और सिस्टम का इस तरह ठप होना उनकी चिंताओं को बढ़ाता है।
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