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सरकारी अस्पताल की बदहाली पर बिफरे डीसी भावेश मिश्रा, लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों को लगाई कड़ी फटकार
ICN24 Newsroom 15 अग॰ 2026, 09:37 am

जिला कलेक्टर भावेश मिश्रा ने सरकारी अस्पताल का औचक निरीक्षण किया और साफ-सफाई व रखरखाव में भारी कमियां पाए जाने पर अधिकारियों को सख्त चेतावनी दी।
प्रशासनिक जवाबदेही और सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की दिशा में एक कड़ा रुख अपनाते हुए, जिला कलेक्टर (डीसी) भावेश मिश्रा ने एक स्थानीय सरकारी अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान अस्पताल परिसर में व्याप्त अव्यवस्था और रखरखाव की खराब स्थिति को देखकर उन्होंने संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को कड़ी फटकार लगाई। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
निरीक्षण के दौरान डीसी मिश्रा ने अस्पताल के विभिन्न वार्डों, प्रतीक्षालय और बाहरी परिसरों का बारीकी से जायजा लिया। उन्होंने पाया कि अस्पताल की सफाई व्यवस्था मानकों के अनुरूप नहीं थी और दीवारों से लेकर शौचालयों तक की स्थिति अत्यंत दयनीय थी। कचरा प्रबंधन में लापरवाही और चिकित्सा उपकरणों के अनुचित रखरखाव को लेकर उन्होंने नाराजगी व्यक्त की। कलेक्टर ने मौके पर मौजूद अधिकारियों से जवाब-तलबी की और पूछा कि बार-बार दिए गए निर्देशों के बावजूद स्थिति में सुधार क्यों नहीं हो रहा है।
भावेस मिश्रा ने केवल मौखिक फटकार ही नहीं लगाई, बल्कि उन्होंने अस्पताल प्रशासन को एक निश्चित समय सीमा के भीतर सभी कमियों को दूर करने का अल्टीमेटम भी दिया। उन्होंने कहा कि अस्पताल केवल उपचार का केंद्र नहीं होता, बल्कि स्वच्छता उसकी पहली शर्त होनी चाहिए। यदि वातावरण ही अस्वास्थ्यकर होगा, तो मरीजों के ठीक होने की प्रक्रिया में बाधा आएगी। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी कि यदि अगली बार निरीक्षण के दौरान ऐसी ही स्थिति पाई गई, तो जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी और उनकी वार्षिक कार्य रिपोर्ट (ACR) में प्रतिकूल टिप्पणी दर्ज की जाएगी।
भारत के ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में सरकारी अस्पतालों की स्थिति अक्सर चिंता का विषय रही है। ऑस्ट्रेलिया में बसे प्रवासी भारतीय समुदाय के लिए, जो वहां की सुदृढ़ सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली (जैसे मेडिकेयर) के आदी हैं, भारत से ऐसी खबरें प्रशासनिक सक्रियता का संकेत देती हैं। प्रवासी भारतीयों का एक बड़ा हिस्सा अक्सर भारत में अपने बुजुर्ग माता-पिता और परिजनों की स्वास्थ्य देखभाल को लेकर चिंतित रहता है। इस तरह के औचक निरीक्षण और अधिकारियों की जवाबदेही तय करने वाले कदम इस बात का भरोसा दिलाते हैं कि जमीन पर बदलाव की कोशिशें जारी हैं।
कलेक्टर ने अस्पताल प्रबंधन को निर्देश दिया कि वे नियमित अंतराल पर मेंटेनेंस ऑडिट करवाएं और स्थानीय वेंडर के साथ समन्वय बिठाकर साफ-सफाई सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि संसाधनों की कमी का बहाना बनाकर मरीजों की सुरक्षा और स्वच्छता से समझौता नहीं किया जा सकता। इस दौरे के बाद स्थानीय नागरिकों में भी एक उम्मीद जगी है कि अस्पताल की स्थिति में जल्द ही सुधार देखने को मिलेगा। प्रशासन के इस कड़े रुख को भ्रष्टाचार और लापरवाही के खिलाफ एक बड़े संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
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