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प्रोफेशनल सर्विसेज में बड़े सुधारों की जरूरत, नीति आयोग ने उच्च-कुशल नौकरियों के लिए दिया व्यापक सुझाव
ICN24 Newsroom 15 अग॰ 2026, 06:38 am
नीति आयोग ने पेशेवर सेवा क्षेत्र में पुराने कानूनों को बदलने और नियामक सुधारों की सिफारिश की है ताकि भारत उच्च-कुशल नौकरियों का केंद्र बन सके।
नीति आयोग ने भारत के पेशेवर सेवा क्षेत्र (Professional Services Sector) में व्यापक नियामक सुधारों की आवश्यकता पर बल दिया है। आयोग की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, यदि भारत को वैश्विक स्तर पर उच्च-कुशल नौकरियों (High-Skilled Jobs) का केंद्र बनाना है, तो कानूनी, लेखा (Accountancy), और वास्तुकला (Architecture) जैसे क्षेत्रों में मौजूदा बाधाओं को दूर करना अनिवार्य है। यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब भारत अपनी अर्थव्यवस्था को सेवा-आधारित निर्यात के माध्यम से गति देने का प्रयास कर रहा है।
रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि भारत का आईटी क्षेत्र तो वैश्विक स्तर पर सफल रहा है, लेकिन अन्य पेशेवर सेवाएं अभी भी पुराने और प्रतिबंधात्मक नियमों के कारण पिछड़ी हुई हैं। नीति आयोग का मानना है कि इन क्षेत्रों में सुधार से न केवल घरेलू स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि भारतीय पेशेवरों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों, विशेष रूप से ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में रास्ते और आसान होंगे।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय पेशेवरों के लिए यह विकास अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच हुए आर्थिक सहयोग और व्यापार समझौते (ECTA) के तहत दोनों देश पहले से ही सेवाओं के व्यापार को सुगम बनाने पर काम कर रहे हैं। नीति आयोग का सुझाव है कि भारत को अपनी नियामक संस्थाओं, जैसे बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) और चार्टर्ड अकाउंटेंट्स संस्थान (ICAI) के नियमों में लचीलापन लाना चाहिए। इससे भारतीय फर्मों को बड़े पैमाने पर काम करने और अंतरराष्ट्रीय मानकों को अपनाने में मदद मिलेगी।
आयोग ने इस बात पर चिंता व्यक्त की है कि वर्तमान में कई पेशेवर क्षेत्रों में फर्मों के आकार और उनके द्वारा दी जाने वाली सेवाओं के विज्ञापनों पर प्रतिबंध हैं। इन प्रतिबंधों के कारण भारतीय कंपनियां वैश्विक प्रतिस्पर्धा में टिक नहीं पातीं। रिपोर्ट में 'मल्टी-डिसिप्लिनरी प्रैक्टिस' (MDP) को बढ़ावा देने की सिफारिश की गई है, जिससे एक ही छत के नीचे विभिन्न प्रकार की पेशेवर सेवाएं दी जा सकें।
अंततः, नीति आयोग की यह सिफारिश भारत की 'सॉफ्ट पावर' को वैश्विक आर्थिक मंच पर और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यदि इन सुधारों को लागू किया जाता है, तो यह ऑस्ट्रेलिया-भारत गलियारे में काम करने वाले डॉक्टरों, इंजीनियरों, वकीलों और लेखाकारों के लिए पारस्परिक मान्यता और व्यापार के नए द्वार खोलेगा। यह न केवल प्रतिभा के पलायन को रोकेगा, बल्कि भारत को 'ग्लोबल टैलेंट हब' के रूप में स्थापित करेगा।
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