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ओड़िशा में अब कैशलेस और पेपरलेस होगी जमीन की रजिस्ट्री, प्रवासियों के लिए बड़ी राहत
ICN24 Newsroom 8 जुल॰ 2026, 06:31 pm

ओड़िशा सरकार ने भूमि पंजीकरण प्रक्रिया को पूरी तरह से डिजिटल बनाने का निर्णय लिया है, जिससे अब कार्यालयों के चक्कर काटने से मुक्ति मिलेगी।
ओड़िशा सरकार ने राज्य में भूमि प्रशासन को और अधिक पारदर्शी और कुशल बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। राजस्व और आपदा प्रबंधन विभाग ने अब भूमि पंजीकरण (Land Registration) की पूरी प्रक्रिया को कैशलेस और पेपरलेस बनाने का निर्णय लिया है। इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद, संपत्ति के खरीदारों और विक्रेताओं को अपने आवेदन जमा करने या दस्तावेजों के भौतिक सत्यापन के लिए सरकारी कार्यालयों के बार-बार चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं होगी। यह सुधार विशेष रूप से उन लोगों के लिए गेम-चेंजर साबित होगा जो राज्य से बाहर या विदेशों में रह रहे हैं।
प्रस्तावित ढांचे के तहत, पूरी पंजीकरण प्रक्रिया ऑनलाइन संचालित की जाएगी। इसमें ई-केवाईसी (e-KYC) और डिजिटल हस्ताक्षरों का उपयोग किया जाएगा, जिससे धोखाधड़ी की संभावना कम होगी और बिचौलियों की भूमिका समाप्त हो जाएगी। दस्तावेजों का डिजिटल संग्रहण न केवल समय की बचत करेगा, बल्कि रिकॉर्ड के रखरखाव को भी अधिक सुरक्षित बनाएगा। सरकार का लक्ष्य प्रशासन में मानवीय हस्तक्षेप को कम करना और 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को बढ़ावा देना है।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय, विशेष रूप से ओड़िशा मूल के प्रवासियों के लिए यह खबर अत्यंत महत्वपूर्ण है। अक्सर प्रवासी भारतीयों (NRIs) को अपनी पैतृक संपत्ति के प्रबंधन या नई संपत्ति खरीदने के लिए भारत की लंबी यात्राएं करनी पड़ती थीं और जटिल कागजी कार्यवाही का सामना करना पड़ता था। नई डिजिटल प्रणाली के माध्यम से, वे अब दुनिया के किसी भी कोने से अपनी संपत्ति का पंजीकरण और प्रबंधन अधिक आसानी से कर सकेंगे। इससे न केवल उनकी यात्रा की लागत बचेगी, बल्कि पूरी प्रक्रिया में अधिक स्पष्टता भी आएगी।
राजस्व विभाग के सूत्रों के अनुसार, इस प्रणाली को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। पहले चरण में कुछ प्रमुख जिलों को शामिल किया जाएगा, जिसके बाद इसे पूरे राज्य में विस्तारित किया जाएगा। डिजिटल पोर्टल को बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों के साथ भी एकीकृत किया जाएगा, जिससे स्टाम्प ड्यूटी और पंजीकरण शुल्क का भुगतान सीधे और सुरक्षित तरीके से हो सके। यह कदम मुख्यमंत्री के '5T' (ट्रांसपेरेंसी, टेक्नोलॉजी, टीमवर्क, टाइम और ट्रांसफॉर्मेशन) शासन मॉडल का हिस्सा है, जो राज्य में प्रशासनिक सुधारों को गति दे रहा है।
कुल मिलाकर, ओड़िशा की यह पहल भारत में भूमि सुधारों के क्षेत्र में एक मानक स्थापित कर सकती है। यह न केवल स्थानीय निवासियों के लिए जीवन सुगम बनाएगी, बल्कि वैश्विक भारतीय समुदाय के साथ राज्य के आर्थिक और प्रशासनिक संबंधों को भी और मजबूत करेगी। डिजिटल इंडिया के विजन को धरातल पर उतारते हुए, यह व्यवस्था भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने और सरकारी सेवाओं को जनता के द्वार तक पहुँचाने की दिशा में एक मील का पत्थर है।
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