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यूएनएससी की दावेदारी: न्यूयॉर्क पहुंचे विदेश मंत्री एस. जयशंकर, संयुक्त राष्ट्र में भारत के मिशन को देंगे नई गति

ICN24 Newsroom 13 जुल॰ 2026, 05:31 pm
यूएनएससी की दावेदारी: न्यूयॉर्क पहुंचे विदेश मंत्री एस. जयशंकर, संयुक्त राष्ट्र में भारत के मिशन को देंगे नई गति

विदेश मंत्री एस. जयशंकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में 2028-29 के कार्यकाल के लिए भारत की उम्मीदवारी का औपचारिक अभियान शुरू करेंगे और महासचिव एंटोनियो गुतारेस से मुलाकात करेंगे।

भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर इस सप्ताह न्यूयॉर्क की महत्वपूर्ण यात्रा पर हैं, जहाँ वे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में वर्ष 2028-29 के कार्यकाल के लिए भारत की अस्थायी सदस्यता के अभियान का औपचारिक शिलान्यास करेंगे। यह यात्रा वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका और 'ग्लोबल साउथ' की आवाज के रूप में उसकी प्रतिष्ठा को और सुदृढ़ करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। न्यूयॉर्क प्रवास के दौरान जयशंकर संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुतारेस के साथ द्विपक्षीय चर्चा करेंगे, जिसमें समकालीन वैश्विक चुनौतियों और सुरक्षा परिषद में आवश्यक सुधारों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। भारत ने पहले ही दिसंबर 2022 में घोषणा कर दी थी कि वह 2028-29 की अवधि के लिए सुरक्षा परिषद की अस्थायी सीट के लिए चुनाव लड़ेगा। जयशंकर की इस यात्रा का उद्देश्य दुनिया भर के राजनयिकों और सदस्य देशों के साथ संवाद स्थापित करना है ताकि भारत की दावेदारी के पक्ष में समर्थन जुटाया जा सके। गौरतलब है कि भारत ने 2021-22 में अपने पिछले कार्यकाल के दौरान आतंकवाद विरोधी प्रयासों, समुद्री सुरक्षा और शांति अभियानों में उल्लेखनीय नेतृत्व प्रदर्शित किया था। अब भारत का लक्ष्य इसी साख को आगे बढ़ाते हुए एक बार फिर विश्व मंच पर निर्णायक भूमिका निभाना है। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए यह घटनाक्रम विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच प्रगाढ़ होते कूटनीतिक संबंध और 'क्वाड' (Quad) समूह के माध्यम से हिंद-प्रशांत क्षेत्र में उनकी साझा रणनीतिक भागीदारी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दोनों देशों के कद को बढ़ाया है। ऑस्ट्रेलिया लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में भारत की अधिक महत्वपूर्ण भूमिका का समर्थन करता रहा है। सिडनी, मेलबर्न और पर्थ जैसे शहरों में रहने वाले प्रवासी भारतीयों के लिए भारत की यह कूटनीतिक सक्रियता न केवल गर्व का विषय है, बल्कि यह ऑस्ट्रेलिया के साथ भारत के व्यापारिक और सुरक्षा संबंधों को भी एक नई दिशा प्रदान करती है। विदेश मंत्री जयशंकर अपनी यात्रा के दौरान विभिन्न सदस्य देशों के स्थायी प्रतिनिधियों के साथ उच्च स्तरीय बैठकों की एक श्रृंखला में भाग लेंगे। चर्चा के प्रमुख विषयों में जलवायु परिवर्तन, सतत विकास लक्ष्य (SDG) और वैश्विक शासन ढांचे में सुधार शामिल होने की उम्मीद है। भारत लगातार 'सुधारित बहुपक्षवाद' (Reformed Multilateralism) की वकालत करता रहा है, जिसका अर्थ है कि संयुक्त राष्ट्र जैसे संस्थानों को 21वीं सदी की वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करना चाहिए, न कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की पुरानी व्यवस्था को। विशेषज्ञों का मानना है कि जयशंकर का यह दौरा केवल सीट हासिल करने के बारे में नहीं है, बल्कि यह विश्व को यह संदेश देने के लिए है कि भारत एक 'विश्व मित्र' के रूप में वैश्विक शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। जैसे-जैसे भारत अपनी अर्थव्यवस्था और सैन्य क्षमता का विस्तार कर रहा है, संयुक्त राष्ट्र में उसकी प्रभावी उपस्थिति अंतरराष्ट्रीय नियमों और नीतियों को आकार देने में महत्वपूर्ण साबित होगी। आगामी दिनों में होने वाली बैठकों के परिणाम यह तय करेंगे कि 2028-29 के लिए भारत का मार्ग कितना सुगम होगा, लेकिन जयशंकर के नेतृत्व में भारत की कूटनीतिक आक्रामकता ने पहले ही अपनी मजबूत स्थिति स्पष्ट कर दी है।
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