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जेल भरो आंदोलन का अर्थ: किसान और मजदूर क्यों कर रहे हैं प्रदर्शन? जानें उनकी मुख्य मांगें

ICN24 Newsroom 11 अग॰ 2026, 06:37 pm
जेल भरो आंदोलन का अर्थ: किसान और मजदूर क्यों कर रहे हैं प्रदर्शन? जानें उनकी मुख्य मांगें

भारत भर में किसानों और मजदूरों ने 1000 से अधिक स्थानों पर जेल भरो आंदोलन किया। जानें उनकी प्रमुख मांगों और इस प्रदर्शन के पीछे के बड़े कारणों के बारे में।

भारत के राजनीतिक और सामाजिक परिदृश्य में 'जेल भरो आंदोलन' एक बार फिर चर्चा का विषय बना हुआ है। हाल के दिनों में, देशभर के 1000 से अधिक स्थानों पर हजारों की संख्या में किसान, असंगठित क्षेत्र के मजदूर, खेतिहर श्रमिक और छात्र सड़कों पर उतरे। प्रदर्शनकारियों ने न केवल अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाई, बल्कि प्रतीकात्मक रूप से 'कोर्ट अरेस्ट' (स्वैच्छिक गिरफ्तारी) भी दी, जिसने इस आंदोलन की गंभीरता को रेखांकित किया है। इस व्यापक प्रदर्शन का नेतृत्व मुख्य रूप से अखिल भारतीय किसान सभा (AIKS), सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन्स (CITU) और अखिल भारतीय कृषि श्रमिक संघ (AIAWU) जैसे संगठनों द्वारा किया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि वर्तमान सरकार की नीतियां कॉर्पोरेट घरानों के पक्ष में हैं और आम आदमी, विशेष रूप से ग्रामीण भारत के श्रमिकों की उपेक्षा कर रही हैं। आंदोलन की मुख्य मांगों में सबसे प्रमुख है फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी। किसान संगठनों का कहना है कि स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के आधार पर MSP तय की जानी चाहिए ताकि खेती लाभ का सौदा बन सके। इसके साथ ही, मजदूरों की मांग है कि केंद्र सरकार द्वारा पारित चार श्रम संहिताओं (Labour Codes) को तुरंत वापस लिया जाए, क्योंकि उनका मानना है कि ये कानून श्रमिकों के अधिकारों को कमजोर करते हैं और उन्हें शोषण के प्रति असुरक्षित बनाते हैं। इसके अलावा, प्रदर्शनकारी न्यूनतम वेतन को बढ़ाकर 26,000 रुपये प्रति माह करने, सभी वृद्ध श्रमिकों के लिए पेंशन योजना लागू करने और बढ़ती महंगाई पर लगाम लगाने की मांग कर रहे हैं। शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े छात्रों का विरोध राष्ट्रीय शिक्षा नीति और रोजगार के घटते अवसरों को लेकर है। ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के लिए भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और श्रम सुधारों से जुड़ी यह खबरें विशेष महत्व रखती हैं। प्रवासी भारतीयों (NRIs) का एक बड़ा हिस्सा पंजाब, हरियाणा और केरल जैसे राज्यों से आता है, जहां कृषि अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। भारत में कृषि नीतियों में होने वाले बदलावों का सीधा असर ऑस्ट्रेलिया में रह रहे परिवारों की पैतृक भूमि और उनके रिश्तेदारों की आर्थिक स्थिति पर पड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि आगामी चुनावों से पहले इस तरह के बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती पेश कर सकते हैं। जहां एक ओर सरकार इन सुधारों को आर्थिक प्रगति के लिए आवश्यक बता रही है, वहीं दूसरी ओर 'जेल भरो' जैसे आंदोलन यह संकेत देते हैं कि जमीनी स्तर पर असंतोष काफी गहरा है। यदि इन मांगों पर जल्द कोई ठोस संवाद नहीं हुआ, तो आने वाले समय में यह आंदोलन और अधिक उग्र रूप ले सकता है।
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