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जम्मू-कश्मीर सरकार का आयुष सेवाओं और वेलनेस टूरिज्म के विस्तार पर जोर

ICN24 Admin 2 जून 2026, 03:33 pm
जम्मू-कश्मीर सरकार का आयुष सेवाओं और वेलनेस टूरिज्म के विस्तार पर जोर

जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने प्रदेश में पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को बढ़ावा देने और वेलनेस टूरिज्म के माध्यम से पर्यटन क्षेत्र को नई ऊंचाई देने की योजना बनाई है।

जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने केंद्र शासित प्रदेश में पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों (आयुष) की पहुंच बढ़ाने और इसे पर्यटन क्षेत्र के साथ एकीकृत करने के लिए एक महत्वाकांक्षी कार्ययोजना पर काम शुरू कर दिया है। सरकार का मुख्य उद्देश्य न केवल स्थानीय निवासियों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना है, बल्कि जम्मू-कश्मीर को वैश्विक 'वेलनेस टूरिज्म' (स्वास्थ्य पर्यटन) के केंद्र के रूप में स्थापित करना भी है। हाल ही में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान, वरिष्ठ अधिकारियों ने आयुष (आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी) के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया। सरकार का मानना है कि जम्मू-कश्मीर की प्राकृतिक सुंदरता और शुद्ध जलवायु इसे योग और ध्यान केंद्रों के लिए आदर्श स्थान बनाती है। प्रशासन की योजना प्रमुख पर्यटक स्थलों पर विशेष आयुष वेलनेस केंद्र स्थापित करने की है, जहां पर्यटकों को पारंपरिक उपचार और मानसिक शांति के लिए विशेष सत्र उपलब्ध कराए जाएंगे। स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, आयुष आउटरीच कार्यक्रम के तहत ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में मोबाइल चिकित्सा इकाइयों और नए स्वास्थ्य केंद्रों की संख्या बढ़ाई जाएगी। इसके माध्यम से उन क्षेत्रों तक चिकित्सा सहायता पहुंचाई जाएगी जहां आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं की कमी है। इसके अलावा, स्थानीय स्तर पर जड़ी-बूटियों की खेती को भी प्रोत्साहन दिया जा रहा है ताकि दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके और स्थानीय किसानों को रोजगार के नए अवसर मिलें। वेलनेस टूरिज्म पर ध्यान केंद्रित करते हुए, सरकार निजी क्षेत्र के साथ साझेदारी की संभावनाएं भी तलाश रही है। प्रशासन का लक्ष्य लक्जरी रिजॉर्ट्स में आयुष स्पा और हीलिंग सेंटर विकसित करना है। इससे न केवल विदेशी पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होगी, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। अधिकारियों ने निर्देश दिया है कि आयुष केंद्रों के मानकीकरण और गुणवत्ता नियंत्रण पर विशेष ध्यान दिया जाए ताकि अंतरराष्ट्रीय मानकों को पूरा किया जा सके। विशेषज्ञों का कहना है कि कोविड-19 महामारी के बाद दुनिया भर में लोग प्राकृतिक और पारंपरिक चिकित्सा की ओर आकर्षित हो रहे हैं। जम्मू-कश्मीर की भौगोलिक स्थिति इस मांग को पूरा करने के लिए पूरी तरह सक्षम है। सरकार की इस पहल से जहां स्वास्थ्य सेवाओं का लोकतंत्रीकरण होगा, वहीं यह कदम जम्मू-कश्मीर की पहचान एक वैश्विक 'हीलिंग डेस्टिनेशन' के रूप में बनाने में सहायक सिद्ध होगा। आने वाले महीनों में, प्रशासन कई जागरूकता अभियानों और आयुष मेलों का आयोजन करने वाला है ताकि आम जनता को इन सेवाओं के लाभों के बारे में शिक्षित किया जा सके।
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