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अल्फा-गल सिंड्रोम: टिक्स के काटने से होने वाली मांस और डेयरी की जानलेवा एलर्जी का बढ़ा खतरा

ICN24 Newsroom 16 जून 2026, 09:31 pm
अल्फा-गल सिंड्रोम: टिक्स के काटने से होने वाली मांस और डेयरी की जानलेवा एलर्जी का बढ़ा खतरा

टिक्स के काटने से होने वाला अल्फा-गल सिंड्रोम अब एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बन गया है, जिससे मांस और डेयरी उत्पादों से जानलेवा एलर्जी हो सकती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने हाल ही में 'अल्फा-गल सिंड्रोम' (AGS) को लेकर चेतावनी जारी की है, जो टिक्स (Ticks) के काटने से होने वाली एक दुर्लभ लेकिन बेहद गंभीर एलर्जी है। यह स्थिति व्यक्ति के शरीर में रेड मीट (लाल मांस) और कुछ डेयरी उत्पादों के प्रति ऐसी प्रतिक्रिया पैदा करती है जो जानलेवा साबित हो सकती है। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए यह जानकारी विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहाँ के तटीय इलाकों और बुशवॉकिंग ट्रेल पर टिक्स का मिलना बेहद आम है। अल्फा-गल सिंड्रोम तब विकसित होता है जब एक विशेष प्रकार का टिक किसी व्यक्ति को काटता है और उसके शरीर में 'गैलेक्टोज-अल्फा-1,3-गैलेक्टोज' नामक शुगर अणु संचारित कर देता है। यह अणु गाय, सूअर और भेड़ जैसे स्तनधारियों के मांस में भी पाया जाता है। एक बार जब मानव शरीर का इम्यून सिस्टम इस अणु के प्रति संवेदनशील हो जाता है, तो अगली बार मांस या दूध का सेवन करने पर शरीर गंभीर एलर्जिक रिएक्शन देता है। इसके लक्षण अक्सर भोजन करने के तीन से छह घंटे बाद दिखाई देते हैं, जिससे इसका निदान करना मुश्किल हो जाता है। लक्षणों में पित्ती (hives), खुजली, चेहरे या होठों पर सूजन, पेट में तेज दर्द और सांस लेने में तकलीफ शामिल है। कुछ मामलों में, यह एनाफिलेक्टिक शॉक का कारण बन सकता है, जो एक मेडिकल इमरजेंसी है। ऑस्ट्रेलियाई शोधकर्ताओं का कहना है कि टिक्स न केवल अल्फा-गल सिंड्रोम फैलाते हैं, बल्कि वे लाइम रोग (Lyme disease) और रॉकी माउंटेन स्पॉटेड फीवर जैसे गंभीर संक्रमणों के वाहक भी होते हैं। हालांकि ऑस्ट्रेलिया में लाइम रोग जैसी बीमारियों पर बहस जारी है, लेकिन टिक्स से होने वाली एलर्जी के बढ़ते मामलों ने चिकित्सा जगत की चिंता बढ़ा दी है। भारतीय मूल के लोग जो ऑस्ट्रेलिया के पार्कों या जंगलों में सैर के शौकीन हैं, उन्हें विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। बचाव के लिए विशेषज्ञों का सुझाव है कि बाहर निकलते समय लंबी आस्तीन के कपड़े पहनें, शरीर पर रिपेलेंट (कीट भगाने वाली क्रीम) का उपयोग करें और घर लौटने पर शरीर की अच्छी तरह जांच करें। यदि आपको टिक काट ले, तो उसे सुरक्षित रूप से निकालने के लिए डॉक्टर की सलाह लें। वर्तमान में अल्फा-गल सिंड्रोम का कोई स्थायी इलाज नहीं है, इसलिए बचाव ही सबसे सुरक्षित रास्ता है।
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