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'भौतिक दुनिया से परे': शशि थरूर द्वारा पीएम मोदी की 'प्रशंसा' पर कांग्रेस का कटाक्ष, पार्टी के भीतर बढ़ा विवाद
ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 03:43 pm
कांग्रेस ने शशि थरूर के उस दावे पर कटाक्ष किया है जिसमें उन्होंने कहा था कि पीएम मोदी ने डोनाल्ड ट्रंप के साथ नाविकों का मुद्दा उठाया। पवन खेड़ा ने इसे काल्पनिक बताया।
कांग्रेस पार्टी के भीतर एक नया विवाद तब खड़ा हो गया जब वरिष्ठ नेता और तिरुवनंतपुरम के सांसद शशि थरूर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राजनयिक भूमिका की सराहना की। थरूर ने कथित तौर पर टिप्पणी की थी कि प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिका के निर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ अपनी बातचीत के दौरान भारतीय नागरिक नाविकों (civilian sailors) की समस्याओं का मुद्दा उठाया था। हालांकि, पार्टी के आधिकारिक प्रवक्ता पवन खेड़ा ने इस दावे पर कड़ा ऐतराज जताते हुए इसे 'भौतिक दुनिया से परे' करार दिया।
पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया पर थरूर के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि आधिकारिक रिकॉर्ड में ऐसी किसी बातचीत का कोई जिक्र नहीं है। खेड़ा का संकेत था कि थरूर प्रधानमंत्री मोदी को उन कार्यों का श्रेय दे रहे हैं जो शायद हुए ही नहीं। कांग्रेस के संचार विभाग के वरिष्ठ सदस्यों ने इसे 'अति-उत्साह' बताते हुए रेखांकित किया कि विपक्षी नेताओं को सरकार के दावों की पुष्टि किए बिना उनकी प्रशंसा करने से बचना चाहिए।
यह घटना तब हुई है जब भारत और अमेरिका के बीच नए प्रशासन के आगमन के साथ संबंधों की एक नई दिशा तय हो रही है। थरूर, जो स्वयं एक पूर्व अंतरराष्ट्रीय राजनयिक रहे हैं, अक्सर प्रधानमंत्री मोदी की विदेश नीति के कुछ पहलुओं की सराहना करने के लिए जाने जाते हैं, जो अक्सर कांग्रेस की आधिकारिक लाइन से अलग होती है। थरूर का तर्क था कि भारत की चिंताओं को वैश्विक मंच पर मजबूती से रखना प्रधानमंत्री की जिम्मेदारी है और उन्होंने इसी संदर्भ में नाविकों के मुद्दे का जिक्र किया था।
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के लिए भारत की विदेश नीति और प्रमुख वैश्विक नेताओं के साथ प्रधानमंत्री के संबंध अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। क्वाड (Quad) गठबंधन के सदस्य के रूप में, ऑस्ट्रेलिया के प्रवासी भारतीय इस बात पर कड़ी नजर रखते हैं कि भारत किस तरह अमेरिका के साथ अपने संबंधों को संतुलित करता है। इस तरह के राजनीतिक विवाद यह दर्शाते हैं कि भारत की घरेलू राजनीति विदेश नीति के मुद्दों पर कितनी विभाजित हो सकती है, जिसका असर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि पर भी पड़ता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि कांग्रेस के भीतर यह खींचतान पार्टी की आंतरिक रणनीति में बदलाव का संकेत है। जहां थरूर जैसे नेता 'रचनात्मक विरोध' की वकालत करते हैं, वहीं पार्टी का मुख्य नेतृत्व प्रधानमंत्री की किसी भी प्रकार की प्रशंसा को राजनीतिक रूप से आत्मघाती मानता है। पवन खेड़ा की तीखी प्रतिक्रिया यह स्पष्ट करती है कि कांग्रेस अब भाजपा के 'क्रेडेबिलिटी' दावों को किसी भी स्तर पर चुनौती देने से पीछे नहीं हटेगी।
फिलहाल, इस विवाद ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि क्या विदेश नीति जैसे संवेदनशील मुद्दों पर देश के प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच आम सहमति होनी चाहिए या नहीं। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई प्रवासियों के बीच अक्सर इस बात पर चर्चा होती है कि भारत की घरेलू राजनीति को उसकी वैश्विक पहुंच में बाधा नहीं बनना चाहिए। इस प्रकरण ने थरूर के पार्टी के भीतर भविष्य के रुख पर भी सवालिया निशान लगा दिए हैं।
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