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बिल गेट्स की बड़ी टेक कंपनियों को चेतावनी: डेटा सेंटर निर्माण में 'आधी सच्चाई' स्वीकार नहीं करेंगे अमेरिकी

ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 03:28 pm
बिल गेट्स की बड़ी टेक कंपनियों को चेतावनी: डेटा सेंटर निर्माण में 'आधी सच्चाई' स्वीकार नहीं करेंगे अमेरिकी

बिल गेट्स ने अमेज़न और गूगल जैसी कंपनियों को आगाह किया है कि डेटा सेंटर के नाम पर जनता पर बिजली का बोझ डालना महंगा पड़ेगा।

माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक बिल गेट्स ने दुनिया की सबसे बड़ी तकनीकी कंपनियों—अमेज़न, गूगल, मेटा और स्वयं माइक्रोसॉफ्ट—को एक कड़ा संदेश दिया है। गेट्स ने चेतावनी दी है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के लिए बनाए जा रहे विशाल डेटा केंद्रों के निर्माण को जनता के सामने 'आधी-अधूरी सच्चाई' के साथ पेश नहीं किया जा सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि इन परियोजनाओं का लाभ सही ढंग से नहीं मिला, तो आम नागरिक बिजली के बढ़े हुए बिलों के माध्यम से इन कंपनियों के 'गलत दांव' की भरपाई नहीं करेंगे। यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब वैश्विक स्तर पर एआई की दौड़ तेज हो गई है। डेटा केंद्रों को चलाने के लिए भारी मात्रा में ऊर्जा की आवश्यकता होती है, जिससे बिजली ग्रिड पर दबाव बढ़ रहा है। गेट्स के अनुसार, इनमें से कुछ मेगा-कॉम्प्लेक्स शायद कभी लाभदायक साबित न हों। उन्होंने कहा कि कोई भी समुदाय ऐसी स्थिति को स्वीकार नहीं करेगा जहां बड़ी कंपनियों के निवेश की विफलता का बोझ आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़े। आंकड़े बताते हैं कि यह चेतावनी केवल काल्पनिक नहीं है। साल 2025 में अब तक लगभग 156 बिलियन डॉलर की लागत वाली 48 परियोजनाओं को पहले ही रोका जा चुका है। अमेरिका में इन परियोजनाओं के प्रति सार्वजनिक समर्थन मात्र 26 प्रतिशत रह गया है। यह गिरावट दर्शाती है कि लोग तकनीकी प्रगति के नाम पर अपने संसाधनों और आर्थिक स्थिरता से समझौता करने के लिए तैयार नहीं हैं। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए यह खबर विशेष महत्व रखती है। ऑस्ट्रेलिया, विशेष रूप से सिडनी और मेलबर्न, वर्तमान में डेटा सेंटर के विस्तार के एक बड़े केंद्र के रूप में उभर रहे हैं। सिडनी का वेस्टर्न सबर्ब्स क्षेत्र तकनीकी बुनियादी ढांचे का गढ़ बनता जा रहा है। यहां काम करने वाले हजारों भारतीय मूल के आईटी पेशेवर और इंजीनियर इस बदलाव का हिस्सा हैं। यदि अमेरिका की तरह ऑस्ट्रेलिया में भी ऊर्जा संकट या बिजली की कीमतों में वृद्धि होती है, तो यहां भी डेटा सेंटर परियोजनाओं को स्थानीय विरोध का सामना करना पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि टेक दिग्गजों को अब अपनी रणनीति बदलनी होगी। उन्हें न केवल ऊर्जा दक्षता पर ध्यान देना होगा, बल्कि स्थानीय समुदायों को यह विश्वास भी दिलाना होगा कि ये परियोजनाएं उनके लिए लाभकारी हैं। बिल गेट्स का बयान इस बात का संकेत है कि अब केवल तकनीकी श्रेष्ठता काफी नहीं है; जनता का विश्वास और पारदर्शिता ही भविष्य की परियोजनाओं की सफलता की कुंजी होगी।
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