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दिमाग में चिप लगने के बाद बोलने में सक्षम हुआ ALS मरीज, दो साल में कहे 20 लाख शब्द

ICN24 Newsroom 16 जून 2026, 08:16 pm
दिमाग में चिप लगने के बाद बोलने में सक्षम हुआ ALS मरीज, दो साल में कहे 20 लाख शब्द

एक क्रांतिकारी शोध में, एमीयोट्रोपिक लेटरल स्क्लेरोसिस (ALS) से पीड़ित व्यक्ति ने ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस की मदद से दो साल में 20 लाख शब्द बोले हैं।

चिकित्सा विज्ञान और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में एक बड़ी सफलता हासिल हुई है। एमीयोट्रोपिक लेटरल स्क्लेरोसिस (ALS) नामक लाइलाज बीमारी से जूझ रहे एक अमेरिकी व्यक्ति, केसी हेरेल ने ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस (BCI) तकनीक के माध्यम से पिछले दो वर्षों में लगभग 20 लाख शब्द कहे हैं। यह उपलब्धि मैसाचुसेट्स जनरल अस्पताल की 'ब्रेनगेट 2' (BrainGate 2) रिसर्च टीम द्वारा विकसित एक विशेष ब्रेन इम्प्लांट के कारण संभव हो पाई है। ALS एक ऐसी गंभीर बीमारी है जो तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करती है और धीरे-धीरे व्यक्ति की मांसपेशियों पर से नियंत्रण खत्म कर देती है, जिससे मरीज बोलने और चलने की क्षमता खो देता है। केसी हेरेल भी अपनी आवाज खो चुके थे, लेकिन उनके मस्तिष्क में लगाए गए इस विशेष चिप ने उनके विचारों को डिजिटल शब्दों में बदलने में मदद की। रिपोर्ट के अनुसार, यह पहला ऐसा मामला है जहां किसी मरीज ने घर पर रहते हुए इतने लंबे समय तक इस तकनीक का निरंतर उपयोग किया है। यह तकनीक कैसे काम करती है, इसे समझना महत्वपूर्ण है। शोधकर्ताओं ने केसी के मस्तिष्क के उस हिस्से में सेंसर लगाए जो बोलने के लिए जिम्मेदार है। जब केसी कुछ बोलने की कोशिश करते हैं, तो ये सेंसर उनके मस्तिष्क के संकेतों को पकड़ लेते हैं। इसके बाद एक उन्नत सॉफ्टवेयर इन संकेतों को डिकोड करता है और उन्हें स्क्रीन पर टेक्स्ट या सिंथेटिक आवाज में बदल देता है। पिछले दो वर्षों के दौरान, इस डिवाइस ने न केवल सटीकता दिखाई है, बल्कि केसी को अपने परिवार और मित्रों के साथ सार्थक बातचीत करने में भी सक्षम बनाया है। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए भी यह खबर अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऑस्ट्रेलिया में मस्कुलर डिस्ट्रॉफी और ALS (जिसे यहां मोटर न्यूरॉन डिजीज या MND भी कहा जाता है) से संबंधित शोध और सहायता समूहों का एक मजबूत नेटवर्क है। भारतीय समुदाय के कई परिवार इन बीमारियों के साथ संघर्ष कर रहे हैं। इस तरह के तकनीकी विकास न केवल मरीजों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाते हैं, बल्कि उनके परिवारों के लिए संचार के द्वार भी खोलते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में यह तकनीक अधिक सुलभ और सस्ती हो सकती है, जिससे दुनिया भर के लाखों लोगों को लाभ मिल सकता है। ब्रेनगेट टीम के अनुसार, यह शोध साबित करता है कि स्पीच-डीकोडिंग इम्प्लांट्स का उपयोग केवल प्रयोगशाला तक सीमित नहीं है, बल्कि इन्हें मरीज के दैनिक जीवन का हिस्सा बनाया जा सकता है। यह तकनीक उन लोगों के लिए एक नई उम्मीद की किरण बनकर उभरी है जो शारीरिक रूप से अक्षम होने के कारण समाज से अलग-थलग महसूस करते हैं। केसी द्वारा बोले गए 20 लाख शब्द केवल आंकड़े नहीं हैं, बल्कि यह उनकी खोई हुई पहचान और आवाज की वापसी का प्रमाण हैं।
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