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क्या आपका बच्चा आपसे झूठ बोलने लगा है? व्यवहार में आए इन बदलावों से करें पहचान
ICN24 Newsroom 2 जुल॰ 2026, 04:31 pm
बच्चों में झूठ बोलने की आदत माता-पिता के लिए चिंता का विषय हो सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, व्यवहार में कुछ खास बदलावों को देखकर आप असलियत का पता लगा सकते हैं।
बच्चों का पालन-पोषण किसी भी अभिभावक के लिए सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है, लेकिन जब बच्चा झूठ बोलना शुरू कर दे, तो यह स्थिति तनावपूर्ण हो सकती है। विशेष रूप से ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के परिवारों के लिए, जहाँ दोहरी संस्कृतियों के बीच तालमेल बिठाना चुनौतीपूर्ण होता है, बच्चों और माता-पिता के बीच संचार की कमी अक्सर इस व्यवहार का कारण बनती है। मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि बच्चे अक्सर सजा के डर से या अपनी गलतियों को छिपाने के लिए झूठ का सहारा लेते हैं।
झूठ बोलने वाले बच्चे के व्यवहार में कुछ स्पष्ट संकेत देखे जा सकते हैं। सबसे पहला बदलाव उनकी आंखों के संपर्क (eye contact) में आता है। यदि आपका बच्चा बात करते समय नज़रें चुरा रहा है या सामान्य से अधिक पलकें झपका रहा है, तो यह घबराहट या सच छिपाने का संकेत हो सकता है। इसके अलावा, शारीरिक हाव-भाव जैसे कि हाथों को बार-बार चेहरे पर ले जाना, पैर हिलाना या बोलते समय हकलाना भी झूठ बोलने की ओर इशारा करते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, झूठ बोलने के पीछे के कारणों को समझना आवश्यक है। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई प्रवासियों में अक्सर बच्चों पर अकादमिक सफलता का भारी दबाव होता है। जब बच्चे इन अपेक्षाओं को पूरा नहीं कर पाते, तो वे माता-पिता की नाराजगी से बचने के लिए अंकों या स्कूल की गतिविधियों के बारे में झूठ बोलने लगते हैं। इसके अलावा, किशोर अवस्था में बच्चे अपनी गोपनीयता (privacy) बनाए रखने के लिए भी झूठ का सहारा ले सकते हैं।
यदि आपको पता चलता है कि आपका बच्चा झूठ बोल रहा है, तो तुरंत चिल्लाना या कड़ी सजा देना स्थिति को और बिगाड़ सकता है। इससे बच्चा अगली बार और अधिक चतुराई से झूठ बोलना सीख सकता है। इसके बजाय, एक शांत और सुरक्षित वातावरण तैयार करना जरूरी है जहाँ बच्चा बिना किसी डर के अपनी बात कह सके। माता-पिता को स्वयं ईमानदारी का उदाहरण पेश करना चाहिए, क्योंकि बच्चे अपने बड़ों को देखकर ही सीखते हैं।
अंततः, बच्चों में झूठ बोलने की प्रवृत्ति को रोकने का सबसे प्रभावी तरीका है उनके साथ एक मजबूत और भरोसेमंद रिश्ता बनाना। उन्हें यह महसूस कराएं कि गलती करना मानवीय है और सच बोलने पर उन्हें सजा के बजाय सुधार का मौका मिलेगा। ऑस्ट्रेलिया के बहुसांस्कृतिक समाज में परवरिश के दौरान संचार के रास्तों को खुला रखना ही सबसे बड़ी कुंजी है।
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