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ईरान और ओमान के बीच हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर समझौता: अमेरिकी और इजराइली जहाजों पर लग सकती है पाबंदी

ICN24 Newsroom 7 अग॰ 2026, 07:41 am
ईरान और ओमान के बीच हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर समझौता: अमेरिकी और इजराइली जहाजों पर लग सकती है पाबंदी

ईरान और ओमान के बीच एक नए समझौते के तहत हॉर्मुज जलडमरूमध्य से अमेरिकी और इजराइली जहाजों के गुजरने पर पाबंदी लग सकती है, जिससे वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर बड़ा असर पड़ने की संभावना है।

ईरान ने सामरिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के प्रबंधन को लेकर ओमान के साथ एक नए समझौते की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस प्रस्तावित समझौते का उद्देश्य इस जलमार्ग से गुजरने वाले अमेरिकी और इजराइली जहाजों पर प्रतिबंध लगाना है। यह कदम पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच वैश्विक समुद्री व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती पेश कर सकता है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल पारगमन बिंदु है, जहाँ से वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है। ईरान की प्रस्तावित योजना के तहत न केवल 'शत्रु देशों' के जहाजों को रोका जाएगा, बल्कि उन देशों से मुआवजे की मांग भी की जाएगी जिन्हें ईरान अपने लिए खतरा मानता है। तेहरान का तर्क है कि इस क्षेत्र की सुरक्षा की जिम्मेदारी केवल क्षेत्रीय देशों की होनी चाहिए और बाहरी ताकतों, विशेषकर अमेरिका की मौजूदगी तनाव को बढ़ाती है। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए यह खबर विशेष महत्व रखती है क्योंकि तेल की कीमतों में किसी भी प्रकार की अस्थिरता का सीधा असर ऑस्ट्रेलिया में पेट्रोल और डीजल के दामों पर पड़ता है। इसके अलावा, भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए फारस की खाड़ी (Persian Gulf) पर बहुत अधिक निर्भर है। यदि हॉर्मुज में कोई व्यवधान आता है, तो भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हो सकती है, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था और विदेशों में बसे प्रवासियों द्वारा भेजे जाने वाले धन (remittances) पर भी प्रभाव पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ओमान के साथ यह समझौता ईरान को इस महत्वपूर्ण जलमार्ग पर अधिक नियंत्रण प्रदान करेगा। ओमान ऐतिहासिक रूप से पश्चिम और ईरान के बीच एक मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहा है, लेकिन इस नए प्रस्ताव में उसकी भागीदारी का स्वरूप अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। यदि यह समझौता प्रभावी होता है, तो यह अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून 'अनक्लोज' (UNCLOS) के तहत मिलने वाले 'इनोसेंट पैसेज' के अधिकारों को चुनौती दे सकता है। ऑस्ट्रेलियाई रणनीतिक हलकों में भी इस घटनाक्रम पर नजर रखी जा रही है, क्योंकि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा का मुद्दा काफी संवेदनशील है। अमेरिका और उसके सहयोगियों ने पहले ही इस क्षेत्र में जहाजों की सुरक्षा के लिए टास्क फोर्स तैनात की हुई है। ईरान का यह नया रुख आने वाले समय में वाशिंगटन और तेहरान के बीच सैन्य और कूटनीतिक टकराव को और तेज कर सकता है।
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