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नियमों से समझौता न करने वाली आईएएस दीप्ति मुखर्जी को बड़ी जिम्मेदारी, उच्च शिक्षा विभाग की मिली कमान

ICN24 Newsroom 12 अग॰ 2026, 03:38 pm
नियमों से समझौता न करने वाली आईएएस दीप्ति मुखर्जी को बड़ी जिम्मेदारी, उच्च शिक्षा विभाग की मिली कमान

मध्य प्रदेश की वरिष्ठ आईएएस अधिकारी दीप्ति मुखर्जी को उनकी सख्त कार्यशैली और नियमों के प्रति प्रतिबद्धता के कारण उच्च शिक्षा सचिव की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है।

मध्य प्रदेश प्रशासन में अपनी ईमानदारी और नियमों के प्रति सख्त रवैये के लिए पहचानी जाने वाली वरिष्ठ आईएएस अधिकारी दीप्ति मुखर्जी को राज्य सरकार ने एक बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। उन्हें उच्च शिक्षा विभाग का सचिव नियुक्त किया गया है। यह निर्णय प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योंकि दीप्ति मुखर्जी को उन अधिकारियों में गिना जाता है जो राजनैतिक दबाव या किसी भी बाहरी प्रभाव में आए बिना केवल नियम-पुस्तिका के आधार पर निर्णय लेने में विश्वास रखती हैं। दीप्ति मुखर्जी की कार्यशैली हमेशा से 'नो-नॉनसेन्स' वाली रही है। अपने पिछले कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई बार स्पष्ट किया कि वे किसी भी ऐसे काम को मंजूरी नहीं देंगी जो नियमों की परिधि से बाहर हो। सूत्रों के अनुसार, उनके इसी कड़े रुख के कारण कई बार उन्हें चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने कभी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। प्रशासन में उनकी इस छवि को देखते हुए ही मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव ने उन्हें उच्च शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील विभाग की कमान सौंपने का निर्णय लिया है। उच्च शिक्षा विभाग में अक्सर नियुक्तियों, तबादलों और बुनियादी ढांचे के विकास को लेकर कई बार विसंगतियां सामने आती रही हैं। ऐसे में दीप्ति मुखर्जी जैसी पारदर्शी छवि वाली अधिकारी की नियुक्ति से विभाग में सुधारात्मक बदलाव आने की उम्मीद जताई जा रही है। उनके करियर ग्राफ पर नजर डालें तो उन्होंने जनजातीय कल्याण और स्कूली शिक्षा जैसे विभागों में भी अपनी अमिट छाप छोड़ी है। वहां भी उन्होंने भ्रष्टाचार और नियमों की अनदेखी पर कड़ी लगाम कसी थी। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए भी इस तरह की खबरें काफी मायने रखती हैं। प्रवासी भारतीय अक्सर भारत की प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार और पारदर्शिता को लेकर चिंतित रहते हैं। दीप्ति मुखर्जी जैसी अधिकारियों की पदोन्नति यह संदेश देती है कि भारतीय नौकरशाही में अब ईमानदारी और नियम-निष्ठा को प्राथमिकता दी जा रही है। जब भारत में प्रशासनिक व्यवस्था मजबूत होती है, तो इसका सीधा सकारात्मक प्रभाव अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि और प्रवासी भारतीयों के निवेश व सहयोग की संभावनाओं पर पड़ता है। आगामी दिनों में उच्च शिक्षा विभाग में कई नई नीतियां लागू होनी हैं, जिनमें नई शिक्षा नीति (NEP) का प्रभावी क्रियान्वयन सबसे महत्वपूर्ण है। दीप्ति मुखर्जी के सामने चुनौती होगी कि वे शैक्षणिक संस्थानों में पारदर्शिता सुनिश्चित करते हुए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा दें। उनकी नियुक्ति यह साबित करती है कि यदि कोई अधिकारी अपने कर्तव्यों के प्रति ईमानदार रहे, तो अंततः उसकी मेहनत और निष्ठा को उचित सम्मान प्राप्त होता है।
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