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हरियाली अमावस्या 2026 पर सूर्य ग्रहण का दुर्लभ संयोग: जानें शुभ मुहूर्त, स्नान-दान का महत्व और सूतक काल की स्थिति
ICN24 Newsroom 12 अग॰ 2026, 02:37 pm

वर्ष 2026 की हरियाली अमावस्या पर एक दुर्लभ खगोलीय घटना घटने जा रही है। जानें स्नान-दान के मुहूर्त और भारत व ऑस्ट्रेलिया में ग्रहण की स्थिति।
हिंदू धर्म में श्रावण मास की अमावस्या, जिसे 'हरियाली अमावस्या' के नाम से जाना जाता है, पर्यावरण और अध्यात्म के संगम का प्रतीक है। वर्ष 2026 में यह तिथि और भी विशेष होने वाली है, क्योंकि इस दिन एक दुर्लभ खगोलीय संयोग बन रहा है। 12 अगस्त 2026 को न केवल हरियाली अमावस्या मनाई जाएगी, बल्कि इसी दिन खग्रास यानी पूर्ण सूर्य ग्रहण भी लगेगा। धार्मिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से इस घटना को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
धार्मिक गणना के अनुसार, अमावस्या तिथि का प्रारंभ 11 अगस्त 2026 को रात्रि 10:34 बजे से होगा और इसका समापन 12 अगस्त 2026 को रात्रि 08:30 बजे होगा। उदय तिथि के आधार पर हरियाली अमावस्या 12 अगस्त को ही मनाई जाएगी। इस दिन पितरों के तर्पण और पवित्र नदियों में स्नान का विशेष महत्व है। विशेषकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा के लिए यह दिन सर्वोत्तम माना गया है। स्नान और दान के लिए शुभ 'ब्रह्म मुहूर्त' सुबह 04:23 बजे से 05:08 बजे तक रहेगा, जबकि अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:00 बजे से 12:52 बजे तक प्रभावी होगा।
सूर्य ग्रहण की बात करें तो, भारतीय समयानुसार (IST) यह 12 अगस्त 2026 की रात 09:05 बजे शुरू होगा और 13 अगस्त की मध्यरात्रि 12:45 बजे समाप्त होगा। ग्रहण का चरम समय (Peak) रात 10:55 बजे होगा। यह पूर्ण सूर्य ग्रहण मुख्य रूप से उत्तरी ध्रुव के क्षेत्रों जैसे ग्रीनलैंड, आइसलैंड और रूस के साथ-साथ स्पेन और अटलांटिक महासागर में दिखाई देगा। यूरोप और उत्तरी अमेरिका के कुछ हिस्सों में यह आंशिक रूप से नजर आएगा।
भारत और ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले श्रद्धालुओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात सूतक काल की स्थिति है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूतक काल के नियम केवल उन्हीं क्षेत्रों में लागू होते हैं जहां ग्रहण प्रत्यक्ष रूप से दिखाई देता है। चूंकि 12 अगस्त 2026 का यह सूर्य ग्रहण भारत में रात के समय लग रहा है और ऑस्ट्रेलिया में भी दृश्य नहीं होगा, इसलिए इन दोनों देशों में 'सूतक काल' मान्य नहीं होगा। श्रद्धालु बिना किसी संशय के अमावस्या के सभी अनुष्ठान, मंदिर दर्शन और पूजा-पाठ संपन्न कर सकते हैं।
हरियाली अमावस्या का एक प्रमुख पहलू वृक्षारोपण है। इस दिन पौधा लगाना 'महादान' की श्रेणी में आता है। शास्त्रों में उल्लेख है कि इस दिन पीपल, बरगद, नीम या तुलसी का पौधा लगाने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लोग भी इस अवसर पर अपने उद्यानों में पौधे लगाकर अपनी परंपरा को जीवित रख सकते हैं। दान के रूप में इस दिन तिल, अन्न, वस्त्र और विशेषकर छाते का दान करने का विधान है, जो पितृ दोष से मुक्ति दिलाने में सहायक माना जाता है।
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