राजनीति
भारत में बनेगा 'आयरन डोम' इंटरसेप्टर? राफेल की इस बड़ी योजना से रक्षा क्षेत्र में आएगा नया उछाल
ICN24 Newsroom 11 जुल॰ 2026, 03:31 pm

इजरायली रक्षा कंपनी राफेल भारत में 'आयरन डोम' मिसाइल इंटरसेप्टर के लिए प्रोडक्शन लाइन लगाने पर विचार कर रही है, जो भारत-इजरायल रक्षा संबंधों को नई दिशा देगा।
बेंगलुरु और दिल्ली के रक्षा गलियारों में इन दिनों भारत की बढ़ती सैन्य ताकत और विनिर्माण क्षमता की चर्चा जोरों पर है। ब्रह्मोस मिसाइल के निर्यात के बाद अब एक और बड़ी उपलब्धि भारत के नाम जुड़ सकती है। इजरायल की प्रमुख रक्षा कंपनी राफेल एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम्स (Rafael Advanced Defense Systems) भारत में अपने विश्व प्रसिद्ध 'आयरन डोम' (Iron Dome) मिसाइल इंटरसेप्टर के लिए एक स्थायी प्रोडक्शन लाइन स्थापित करने पर गंभीरता से विचार कर रही है। यह कदम न केवल भारत की 'मेक इन इंडिया' नीति को मजबूती देगा, बल्कि वैश्विक रक्षा आपूर्ति श्रृंखला में भारत की भूमिका को भी बढ़ाएगा।
राफेल की योजना के अनुसार, आयरन डोम प्रणाली में इस्तेमाल होने वाले 'तामिर' (Tamir) इंटरसेप्टर मिसाइलों का निर्माण भारत में किया जा सकता है। यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी रक्षा जरूरतों के लिए आत्मनिर्भर होने के साथ-साथ एक प्रमुख निर्यातक बनने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है। जानकारों का मानना है कि यदि यह समझौता धरातल पर उतरता है, तो भारत इजरायल के बाहर आयरन डोम तकनीक का एक बड़ा केंद्र बन जाएगा। इससे स्थानीय स्तर पर हजारों कुशल रोजगार पैदा होंगे और उन्नत मिसाइल तकनीक का हस्तांतरण भी संभव हो सकेगा।
इजरायल और भारत के बीच रक्षा साझेदारी दशकों पुरानी है, लेकिन हाल के वर्षों में यह केवल खरीद-फरोख्त से आगे बढ़कर सह-विकास और सह-उत्पादन तक पहुंच गई है। भारत पहले से ही बराक-8 जैसी मिसाइल प्रणालियों पर इजरायल के साथ मिलकर काम कर रहा है। आयरन डोम का इंटरसेप्टर भारत में बनने से भारतीय सेनाओं को कम लागत पर उन्नत वायु रक्षा कवच मिल सकेगा, साथ ही मित्र देशों को इन मिसाइलों के निर्यात की संभावनाएं भी खुलेंगी।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए भी यह खबर गौरव का विषय है। भारत और ऑस्ट्रेलिया दोनों ही 'क्वाड' (Quad) के सदस्य हैं और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा स्थिरता के लिए प्रतिबद्ध हैं। भारत की बढ़ती रक्षा क्षमता ऑस्ट्रेलिया जैसे रणनीतिक साझेदारों के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन को बल मिलता है। सिडनी और मेलबर्न में रक्षा क्षेत्र से जुड़े भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई विशेषज्ञ इस घटनाक्रम को भारत की बढ़ती 'सॉफ्ट और हार्ड पावर' के रूप में देख रहे हैं।
रक्षा विश्लेषकों का कहना है कि ब्रह्मोस की वैश्विक मांग के बाद, आयरन डोम के घटकों का भारत में बनना यह साबित करता है कि वैश्विक कंपनियां अब भारत को केवल एक बाजार नहीं, बल्कि एक विश्वसनीय मैन्युफैक्चरिंग पार्टनर मानती हैं। आने वाले महीनों में इस परियोजना के तकनीकी और वित्तीय पहलुओं पर विस्तृत चर्चा होने की उम्मीद है, जो भारत-इजरायल रणनीतिक साझेदारी के एक नए अध्याय की शुरुआत करेगी।
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