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भारत ने अफगानिस्तान के प्रति अटूट समर्थन दोहराया; संयुक्त समिति की बैठक में मानवीय सहायता पर जोर

ICN24 Newsroom 10 जुल॰ 2026, 04:31 pm
भारत ने अफगानिस्तान के प्रति अटूट समर्थन दोहराया; संयुक्त समिति की बैठक में मानवीय सहायता पर जोर

भारत ने अफगानिस्तान के साथ अपने संबंधों को मजबूत करते हुए स्वास्थ्य, शिक्षा और खाद्य सुरक्षा के माध्यम से मानवीय सहायता जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई है।

भारत ने एक बार फिर अफगानिस्तान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए स्पष्ट किया है कि उसका जुड़ाव वहां के आम नागरिकों की भलाई पर केंद्रित रहेगा। हाल ही में आयोजित एक महत्वपूर्ण संयुक्त समिति की बैठक के दौरान, भारतीय प्रतिनिधियों ने इस बात पर जोर दिया कि नई दिल्ली, काबुल के साथ अपने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को प्राथमिकता देना जारी रखेगी। भारत का मुख्य उद्देश्य अफगानिस्तान की जनता को संकट के समय में व्यावहारिक सहायता प्रदान करना है, ताकि वहां के सामाजिक और आर्थिक ढांचे को मजबूती मिल सके। इस बैठक में चर्चा का मुख्य केंद्र स्वास्थ्य सेवा, खाद्य सुरक्षा, शिक्षा और क्षमता निर्माण रहे। भारतीय पक्ष ने रेखांकित किया कि ये चार क्षेत्र भारत-अफगानिस्तान संबंधों के मुख्य स्तंभ हैं। पिछले कुछ वर्षों में, भारत ने अफगानिस्तान को हजारों टन गेहूं, चिकित्सा सहायता और जीवन रक्षक दवाओं की आपूर्ति की है। यह सहायता सीधे तौर पर वहां के उन परिवारों तक पहुंचाई जा रही है जो वर्तमान में गंभीर आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। भारत का मानना है कि एक स्थिर और समृद्ध अफगानिस्तान न केवल दक्षिण एशिया, बल्कि पूरे क्षेत्र की शांति के लिए आवश्यक है। शिक्षा और क्षमता निर्माण के क्षेत्र में भारत का योगदान सराहनीय रहा है। हजारों अफगान छात्रों ने भारतीय विश्वविद्यालयों में शिक्षा प्राप्त की है, और भारत अब भी इस प्रक्रिया को जारी रखने का पक्षधर है। क्षमता निर्माण के माध्यम से, भारत का लक्ष्य अफगान युवाओं को कौशल प्रदान करना है ताकि वे अपने देश के पुनर्निर्माण में सक्रिय भूमिका निभा सकें। इसके अलावा, स्वास्थ्य क्षेत्र में भारत की ओर से प्रदान की गई एम्बुलेंस सेवाएं और अस्पतालों का रखरखाव वहां की स्वास्थ्य व्यवस्था को सुचारू रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए भी यह घटनाक्रम विशेष महत्व रखता है। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में बसे दक्षिण एशियाई प्रवासी, भारत की क्षेत्रीय भूमिका को बड़े ध्यान से देखते हैं। ऑस्ट्रेलिया और भारत दोनों ही हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता और मानवीय मूल्यों के प्रति साझा दृष्टिकोण रखते हैं। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत की यह 'सॉफ्ट पावर' नीति अफगानिस्तान में कट्टरपंथ को कम करने और मानवीय संकट को रोकने में सहायक सिद्ध हो सकती है। निष्कर्षतः, भारत का रुख यह स्पष्ट करता है कि वह राजनीतिक जटिलताओं के बावजूद अफगानिस्तान की जनता के साथ खड़ा है। यह 'जनता से जनता के बीच संबंध' (People-to-People connection) ही भारत की विदेश नीति की असली ताकत है। आने वाले समय में, भारत अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी अफगानिस्तान की मानवीय जरूरतों के लिए आवाज उठाना जारी रखेगा, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि वहां की बुनियादी सेवाओं में कोई व्यवधान न आए।
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