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कानूनी इन्फ्लुएंसर्स पर नकेल: BCI ने वकीलों और छात्रों के लिए जारी की सख्त सोशल मीडिया गाइडलाइंस
ICN24 Newsroom 19 जुल॰ 2026, 02:35 am
भारतीय विधिज्ञ परिषद (BCI) ने वकीलों और कानून के छात्रों द्वारा सोशल मीडिया के उपयोग पर कड़े नियम लागू किए हैं, जिसमें भ्रामक विज्ञापनों और रील्स पर रोक लगाई गई है।
भारतीय विधिज्ञ परिषद (BCI) ने देश की कानूनी प्रणाली की गरिमा बनाए रखने के लिए एक बड़ा कदम उठाते हुए वकीलों और कानून के छात्रों के लिए सोशल मीडिया के उपयोग पर नए और सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इस नए कोड ऑफ कंडक्ट (आचार संहिता) का मुख्य उद्देश्य 'लीगल इन्फ्लुएंसिंग' के बढ़ते चलन को रोकना और यह सुनिश्चित करना है कि कानूनी पेशे की मर्यादा बनी रहे। BCI ने स्पष्ट किया है कि अधिवक्ता अपने पेशे को चमकाने के लिए सोशल मीडिया का उपयोग विज्ञापन के माध्यम के रूप में नहीं कर सकते।
नए नियमों के अनुसार, अधिवक्ताओं को ऐसी कोई भी सामग्री पोस्ट करने से प्रतिबंधित कर दिया गया है जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उनके कानूनी अभ्यास का विज्ञापन करती हो। इसमें भ्रामक 'रील्स', 'शॉर्ट्स' और ऐसे वीडियो शामिल हैं जो जनता को कानूनी परामर्श देने के नाम पर स्वयं का प्रचार करते हैं। BCI का मानना है कि कानून एक सेवा है, न कि व्यावसायिक उत्पाद, और इसका प्रचार-प्रसार केवल अधिकृत तरीकों से ही होना चाहिए। इसके अलावा, अधिवक्ताओं को न्यायिक कार्यवाही पर टिप्पणी करने या न्यायाधीशों की प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचाने वाली सामग्री साझा करने से भी बचने की चेतावनी दी गई है।
यह नियम केवल मौजूदा वकीलों पर ही नहीं, बल्कि कानून की पढ़ाई कर रहे छात्रों पर भी लागू होते हैं। BCI ने सभी विधि संस्थानों और विश्वविद्यालयों को निर्देश दिया है कि वे अपने छात्रों के सोशल मीडिया आचरण पर कड़ी नजर रखें। यदि कोई छात्र नियमों का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है, जिसका सीधा असर उनके भविष्य के नामांकन (Enrollment) पर पड़ सकता है। छात्रों से अपेक्षा की जाती है कि वे सोशल मीडिया पर ऐसी कोई भी गतिविधि न करें जो कानूनी पेशे की छवि को धूमिल करती हो।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय (NRIs) के लिए यह खबर विशेष महत्व रखती है। ऑस्ट्रेलिया में बसे कई भारतीय अक्सर संपत्ति विवाद, पारिवारिक कानून या विरासत से जुड़े मामलों के लिए भारतीय कानूनी सलाहकारों पर निर्भर रहते हैं। अक्सर देखा गया है कि सोशल मीडिया पर सक्रिय 'कानूनी इन्फ्लुएंसर्स' के भ्रामक दावों के कारण प्रवासी भारतीय गलत जानकारी का शिकार हो जाते हैं। BCI के इस कदम से अब सोशल मीडिया पर उपलब्ध कानूनी जानकारी अधिक प्रमाणित और मर्यादित होगी, जिससे विदेशों में बैठे भारतीय सुरक्षित रूप से सही परामर्श प्राप्त कर सकेंगे।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह बदलाव डिजिटल युग की अनिवार्य आवश्यकता थी। जिस तरह से पिछले कुछ वर्षों में इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर कानूनी परामर्श की बाढ़ आई है, उससे पेशेवर नैतिकता के मानक गिर रहे थे। हालांकि, कुछ वर्गों का यह भी मानना है कि ये नियम अभिव्यक्ति की आजादी और सूचना के प्रसार को सीमित कर सकते हैं। लेकिन BCI का रुख स्पष्ट है—कानूनी पेशा एक महान पेशा है और इसकी साख से समझौता नहीं किया जा सकता। आने वाले हफ्तों में, परिषद इन नियमों के उल्लंघन की निगरानी के लिए एक समर्पित विंग भी गठित कर सकती है।
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