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तेजस Mk-1A कार्यक्रम को मिली रफ्तार: GE Aerospace ने HAL को सौंपा सातवां F404 इंजन
ICN24 Newsroom 9 जुल॰ 2026, 04:31 am

जीई एयरोस्पेस ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) को सातवां F404-IN20 इंजन सौंप दिया है, जिससे तेजस लड़ाकू विमानों के उत्पादन में तेजी आएगी।
भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता और स्वदेशी लड़ाकू विमान कार्यक्रम के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, अमेरिकी दिग्गज कंपनी जीई एयरोस्पेस (GE Aerospace) ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) को सातवां F404-IN20 टर्बोफैन इंजन सौंप दिया है। यह आपूर्ति भारतीय वायुसेना के लिए तैयार किए जा रहे तेजस मार्क-1A (Tejas Mk-1A) विमानों के उत्पादन के लिए एक बड़ी राहत मानी जा रही है। पिछले कुछ समय से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में आई बाधाओं के कारण इस परियोजना की गति धीमी पड़ गई थी, लेकिन अब इंजनों की खेप आने से अंतिम असेंबली लाइन में फिर से तेजी आने की उम्मीद है।
तेजस मार्क-1A कार्यक्रम भारत की हवाई सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारतीय वायुसेना ने HAL को 83 मार्क-1A विमानों का ऑर्डर दिया है, जो वायुसेना के बेड़े में पुराने हो रहे मिग विमानों की जगह लेंगे। F404-IN20 इंजन इस लड़ाकू विमान का हृदय है, जो इसे विषम परिस्थितियों में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन करने की शक्ति प्रदान करता है। जीई एयरोस्पेस द्वारा सातवें इंजन की यह डिलीवरी उस समय हुई है जब भारत अपने रक्षा विनिर्माण क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की कोशिश कर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इंजनों की आपूर्ति में हो रही देरी ने HAL के लिए समय पर डिलीवरी की चुनौती पैदा कर दी थी। हालांकि, जीई एयरोस्पेस ने अब आश्वासन दिया है कि वह आपूर्ति में तेजी लाएगा। इस सातवें इंजन के आगमन से न केवल उत्पादन का बैकलॉग कम होगा, बल्कि भारतीय रक्षा मंत्रालय और अमेरिकी उद्योग के बीच बढ़ते विश्वास को भी मजबूती मिलेगी। यह सहयोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पिछले साल की अमेरिका यात्रा के दौरान हुए महत्वपूर्ण समझौतों की अगली कड़ी के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें भारत में ही इंजनों के सह-उत्पादन की बात कही गई थी।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए भी यह खबर रणनीतिक महत्व रखती है। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच रक्षा संबंध 'क्वाड' (QUAD) और 'मालाबार' अभ्यास के माध्यम से लगातार मजबूत हो रहे हैं। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की सैन्य शक्ति का बढ़ना क्षेत्रीय स्थिरता के लिए आवश्यक माना जाता है। ऑस्ट्रेलिया में बसे रक्षा विशेषज्ञों और प्रवासी भारतीयों का मानना है कि एक मजबूत भारतीय वायुसेना न केवल भारत की सीमाओं की रक्षा करती है, बल्कि साझा लोकतांत्रिक मूल्यों वाले देशों के साथ साझेदारी में भी एक विश्वसनीय स्तंभ की भूमिका निभाती है।
आने वाले महीनों में, HAL की योजना अपनी उत्पादन क्षमता को प्रति वर्ष 16 विमानों तक ले जाने की है। इसके लिए इंजनों की निर्बाध आपूर्ति अनिवार्य है। जीई के इस कदम से यह स्पष्ट है कि रक्षा क्षेत्र के वैश्विक खिलाड़ी भारत को एक भरोसेमंद और दीर्घकालिक भागीदार के रूप में देख रहे हैं। यदि इंजन आपूर्ति की यह निरंतरता बनी रहती है, तो भारतीय वायुसेना के स्क्वाड्रन की संख्या में हो रही कमी को तेजी से पूरा किया जा सकेगा, जो अंततः देश की संप्रभुता और वैश्विक सुरक्षा ढांचे के लिए एक सकारात्मक संकेत है।
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