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मेलबर्न में फिर मिलीं अफगान बहनें: नागरिकता की ओर बढ़ा अदीबा और आर्या का सफर
ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 12:47 am
पांच साल की लंबी जुदाई के बाद अफगानिस्तान की दो बहनें मेलबर्न में मिलीं। अब वे ऑस्ट्रेलियाई नागरिकता प्राप्त करने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
पांच साल की अनिश्चितता और भौगोलिक दूरियों के बाद, अदीबा और आर्या गंजी आखिरकार मेलबर्न में एक-दूसरे के गले लग सकीं। अफगानिस्तान के अशांत और असुरक्षित माहौल से भागते समय अलग हुई ये दोनों बहनें अब ऑस्ट्रेलिया में एक नई जिंदगी की शुरुआत कर रही हैं। यह मिलन केवल दो बहनों का पुनर्मिलन नहीं है, बल्कि यह ऑस्ट्रेलियाई नागरिकता की ओर उनके बढ़ते कदमों का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और भावुक पड़ाव भी है।
अदीबा और आर्या का सफर संघर्षों और चुनौतियों से भरा रहा है। जब अफगानिस्तान में सुरक्षा व्यवस्था चरमराने लगी, तो दोनों बहनों को अपना घर छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा। पलायन की अफरा-तफरी और अराजकता के बीच दोनों का संपर्क टूट गया और वे अलग-अलग दिशाओं में निकल गईं। जहां एक बहन को पहले सुरक्षित रास्ता मिल गया और उसने ऑस्ट्रेलिया में शरण ली, वहीं दूसरी को यहां तक पहुंचने के लिए कई देशों से गुजरते हुए एक लंबा और बेहद कठिन इंतजार करना पड़ा।
मेलबर्न हवाई अड्डे पर हुआ उनका पुनर्मिलन गंजी परिवार के लिए एक नया जन्म लेने जैसा था। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए, जो पारिवारिक मूल्यों और अपनों से जुड़ाव को सर्वोपरि मानता है, यह कहानी विशेष महत्व रखती है। हालांकि भारतीय प्रवासियों के आने की परिस्थितियां आमतौर पर पेशेवर या कौशल आधारित होती हैं, लेकिन सुरक्षा, परिवार की एकजुटता और एक बेहतर भविष्य की तलाश वह साझा सूत्र है जो ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले पूरे दक्षिण एशियाई डायस्पोरा को एक-दूसरे से जोड़ता है।
2021 में काबुल के पतन के बाद से, ऑस्ट्रेलिया के मानवीय सहायता कार्यक्रम (Humanitarian Program) ने हजारों अफगान नागरिकों को नई उम्मीद दी है। स्थायी निवास और फिर नागरिकता प्राप्त करने की यह प्रक्रिया काफी जटिल होती है, जिसमें कड़ी सुरक्षा जांच और लंबा समय लगता है। अदीबा और आर्या के लिए अब आगे का रास्ता साफ है। वे वर्तमान में नागरिकता प्राप्त करने के लिए आवश्यक चरणों को पूरा कर रही हैं। यह कानूनी दर्जा उन्हें वह स्थिरता और सुरक्षा प्रदान करेगा, जिसकी कमी उन्होंने पिछले पांच वर्षों में हर पल महसूस की थी।
मेलबर्न के स्थानीय सामुदायिक समूहों और स्वयंसेवकों ने उनके पुनर्वास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अंग्रेजी भाषा की कक्षाओं से लेकर गृह विभाग (Department of Home Affairs) की कानूनी बारीकियों को समझने तक, इन बहनों को एक ऐसा नेटवर्क मिला जिसने उन्हें कभी अकेला महसूस नहीं होने दिया। ऑस्ट्रेलिया में नागरिकता प्राप्त करना केवल एक पासपोर्ट हासिल करना नहीं है, बल्कि यह उस समाज के प्रति वफादारी और कृतज्ञता का संकल्प है जिसने कठिन समय में शरण दी।
जैसे-जैसे वे अपनी नागरिकता परीक्षा और शपथ ग्रहण समारोह की तैयारी कर रही हैं, अदीबा और आर्या की कहानी विस्थापन के बीच मानवीय जिजीविषा की एक मिसाल पेश करती है। यह उन हजारों शरणार्थियों के लिए भी प्रेरणा है जो आज भी अपने बिछड़े हुए परिजनों से मिलने की आस लगाए बैठे हैं। मेलबर्न की गलियों में अब वे अपनी नई पहचान गढ़ रही हैं, जो उनके अफगान मूल और उनकी नई ऑस्ट्रेलियाई पहचान का एक सुंदर संगम होगा।
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