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ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में कड़े किए नियम: उर्वरक आपूर्ति और वैश्विक कीमतों पर गहराया संकट
ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 05:11 pm
ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य में पारगमन नियमों को सख्त करने से वैश्विक उर्वरक आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका है, जिससे भारत और ऑस्ट्रेलिया जैसे कृषि प्रधान देशों में चिंता बढ़ गई है।
वैश्विक व्यापार के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में ईरान द्वारा पारगमन नियमों को कड़ा करने के फैसले ने अंतरराष्ट्रीय उर्वरक बाजार में हलचल पैदा कर दी है। तेहरान द्वारा हाल ही में घोषित की गई नई नियामक आवश्यकताओं के तहत इस जलमार्ग से गुजरने वाले मालवाहक जहाजों के लिए कड़े दिशानिर्देश लागू किए गए हैं। इस कदम से उर्वरक के बड़े खेपों (Cargoes) की आवाजाही में देरी और लागत में वृद्धि होने की संभावना है, जिसका सीधा असर भारत और ऑस्ट्रेलिया जैसे प्रमुख कृषि आधारित देशों पर पड़ सकता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का एक रणनीतिक चोकपॉइंट है, जहाँ से वैश्विक तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत और खाड़ी देशों से होने वाले उर्वरक निर्यात का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है। ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश उर्वरक उत्पादन के प्रमुख केंद्र हैं और भारत अपनी यूरिया तथा डीएपी (DAP) की जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा इन्हीं देशों से आयात करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जहाजों की आवाजाही में किसी भी प्रकार की बाधा आती है, तो भारत के लिए उर्वरक आयात महंगा हो जाएगा, जिससे सरकार पर सब्सिडी का बोझ बढ़ेगा और किसानों के लिए लागत बढ़ सकती है।
ऑस्ट्रेलियाई परिप्रेक्ष्य में, यह घटनाक्रम खाद की कीमतों में अस्थिरता पैदा कर सकता है। ऑस्ट्रेलिया के किसान अपनी फसल उत्पादन के लिए आयातित उर्वरकों पर निर्भर हैं। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में किसी भी तरह का व्यवधान ऑस्ट्रेलियाई कृषि क्षेत्र के लिए इनपुट लागत में वृद्धि का कारण बनता है, जिससे अंततः खाद्य मुद्रास्फीति (Food Inflation) बढ़ सकती है। मेलबर्न और सिडनी जैसे शहरों में रहने वाले भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए, जो कृषि व्यापार या रसद (Logistics) से जुड़े हैं, यह खबर विशेष महत्व रखती है क्योंकि यह सीधे व्यापारिक मार्जिन को प्रभावित करती है।
ईरान का कहना है कि ये नियम सुरक्षा और पर्यावरणीय मानकों को बनाए रखने के लिए आवश्यक हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षक इसे भू-राजनीतिक दबाव बनाने की रणनीति के रूप में देख रहे हैं। जहाजों के लिए नए पंजीकरण प्रोटोकॉल, निरीक्षण की बढ़ी हुई आवृत्ति और मार्ग के सख्त निर्धारण से शिपिंग कंपनियों को अतिरिक्त परिचालन लागत का सामना करना पड़ रहा है। कई अंतरराष्ट्रीय लॉजिस्टिक फर्मों ने चेतावनी दी है कि यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो उर्वरक माल की ढुलाई करने वाले जहाजों को वैकल्पिक और लंबे रास्तों का चुनाव करना पड़ सकता है, जिससे माल भाड़े (Freight rates) में भारी उछाल आएगा।
भारत सरकार स्थिति पर पैनी नजर रख रही है। चूंकि रबी की बुवाई का सीजन करीब है, उर्वरकों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना राष्ट्रीय प्राथमिकता है। भारतीय विदेश मंत्रालय और उर्वरक विभाग वैकल्पिक स्रोतों और कूटनीतिक रास्तों पर विचार कर रहे हैं ताकि आपूर्ति श्रृंखला में किसी भी बड़े व्यवधान से बचा जा सके। वहीं, ऑस्ट्रेलिया में भी कृषि संगठनों ने सरकार से वैश्विक व्यापार मार्गों की सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करने की अपील की है।
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